Jhiram Ghati
Jhiram Ghati: छत्तीसगढ़ के बस्तर टाइगर कहे जाने वाले दिवंगत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के पुत्र छविंद्र कर्मा ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। छविंद्र कर्मा का कहना है कि झीरम घाटी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा पेश की गई रिपोर्ट और जेपी नड्डा द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयान में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जेपी नड्डा के पास ऐसी कौन सी गुप्त जानकारी है, जो देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी NIA के पास भी नहीं है। उन्होंने इस विरोधाभास को सुलझाने के लिए मामले की पुन: जांच की मांग की है।
इस पूरे विवाद की जड़ जेपी नड्डा का वह भाषण है जो उन्होंने छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान दिया था। नड्डा ने आरोप लगाया था कि 2013 में हुए झीरम घाटी के भीषण नक्सली हमले के पीछे कांग्रेस के ही कुछ अंदरूनी लोगों का हाथ था। उन्होंने कहा, “मैं उस समय भाजपा का प्रभारी था और मैंने घटना को करीब से देखा है। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ कि नक्सलियों को काफिले की लोकेशन और अंदरूनी जानकारी कांग्रेस के ही कुछ लोग दे रहे थे, जो अपने ही नेताओं को मरवाने की साजिश में शामिल थे।” नड्डा के इस दावे ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर पुराने जख्मों को हरा कर दिया है।
नड्डा के आरोपों पर पलटवार करते हुए छविंद्र कर्मा ने कहा कि यह बयान न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि शहीद परिवारों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने तार्किक सवाल उठाते हुए पूछा कि जब यह हमला हुआ तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और जब इसकी जांच NIA ने की, तब केंद्र में भी भाजपा की ही मोदी सरकार थी। यदि नड्डा की बात सही है कि हमला ‘अंदरूनी साजिश’ थी, तो क्या इसका अर्थ यह है कि भाजपा सरकार की जांच एजेंसियां असली गुनहगारों को पकड़ने में पूरी तरह विफल रहीं? छविंद्र ने इसे राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित विरोधाभासी बयान करार दिया।
छविंद्र कर्मा ने याद दिलाया कि 25 मई 2013 की उस काली रात के बाद जब उनके पिता महेंद्र कर्मा का अंतिम संस्कार हुआ, तब तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आर.पी.एन. सिंह (जो अब भाजपा सांसद हैं) वहां मौजूद थे। इतना ही नहीं, वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी बस्तर आकर पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी थी। छविंद्र का तर्क है कि यदि भाजपा नेतृत्व के पास उस समय कोई पुख्ता जानकारी थी, तो उसे जांच का हिस्सा क्यों नहीं बनाया गया? आज इतने वर्षों बाद चुनावी लाभ के लिए ऐसे आरोप लगाना शहीदों के बलिदान का अपमान है।
महेंद्र कर्मा के बेटे ने अब सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस नृशंस हत्याकांड की निष्पक्ष और दोबारा जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस नई जांच में जेपी नड्डा को भी शामिल किया जाना चाहिए और उनसे वह साक्ष्य मांगे जाने चाहिए जिसके आधार पर वे ‘अंदरूनी साजिश’ की बात कर रहे हैं। छविंद्र ने कहा कि सरकार इस नरसंहार को केवल एक साधारण ‘नक्सली घटना’ बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। देश को यह जानने का हक है कि स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े राजनीतिक हत्याकांड के असली मास्टरमाइंड कौन थे।
झीरम घाटी कांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह काला अध्याय है जिसमें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सहित 32 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। दशकों बाद भी यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बना हुआ है। छविंद्र कर्मा की मांग ने एक बार फिर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या गृह मंत्रालय इस संवेदनशील मामले पर दोबारा जांच के आदेश देता है या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाएगा।
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