Jhiram Valley Case : रायपुर में झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने फैसले को लेकर असंतोष जताते हुए इसे पूर्ण न्याय नहीं बताया और मामले में आगे कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात कही। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि हमले की व्यापक साजिश की पूरी जांच नहीं हुई और कई ऐसे लोगों से पूछताछ नहीं की गई, जिनकी भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ये दावे कांग्रेस नेताओं की ओर से किए गए हैं।
भूपेश बघेल बोले, हाईकमान को दी जाएगी पूरी जानकारी
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि झीरम घटना और अदालत के फैसले से जुड़े पूरे मामले की जानकारी कांग्रेस हाईकमान को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व से मार्गदर्शन लेने के बाद कानूनी विशेषज्ञों और वकीलों से चर्चा की जाएगी। इसके आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। कांग्रेस की ओर से दिल्ली में भी इस मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की बात कही गई है।
NIA की जांच पर कांग्रेस ने लगाए आरोप
भूपेश बघेल ने जांच एजेंसी NIA की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि तत्कालीन कांग्रेस नेता कवासी लखमा पर संदेह था, तो उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। बघेल ने दावा किया कि मामले की साजिश से जुड़े पहलुओं की पर्याप्त जांच नहीं हुई। उन्होंने NIA पर राजनीतिक प्रभाव में काम करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं और इनके संबंध में एजेंसी का पक्ष अलग हो सकता है।
साजिश की धारा 120-B को लेकर भी सवाल
बघेल ने आपराधिक साजिश से जुड़ी IPC की धारा 120-B का उल्लेख करते हुए कहा कि 13 साल बाद भी साजिश के पूरे पहलू को स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में कुछ बड़े नक्सली नामों को मामले से हटाया गया और रसद पहुंचाने वाले लोगों को आरोपी बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि तत्कालीन सरकार में रहे लोगों तथा प्रमुख नक्सली नेताओं से अपेक्षित स्तर पर पूछताछ नहीं की गई।
दीपक बैज की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस की बैठक
प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में रायपुर स्थित राजीव भवन में बैठक आयोजित की गई। बैठक में झीरम मामले के फैसले और आगे की कानूनी तथा राजनीतिक रणनीति पर चर्चा हुई। इसमें नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया, पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गेंदु के अलावा झीरम पीड़ित परिवारों, घायलों और विधि विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
NIA अदालत ने 10 आरोपियों को सुनाई मौत की सजा
ताजा अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, NIA की विशेष अदालत ने झीरम घाटी हमले के मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने आपराधिक साजिश और हत्या समेत कई धाराओं के तहत दोषसिद्धि की। मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और अदालत में करीब 294 सुनवाइयां हुईं।
2013 में कांग्रेस परिवर्तन यात्रा पर हुआ था हमला
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर जा रहा था। झीरम घाटी के पास माओवादी हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और अन्य लोगों की मौत हुई थी। मृतकों की संख्या को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में अंतर है, जबकि ताजा अदालती रिपोर्टों में कम से कम 27 लोगों की मौत और 38 लोगों के घायल होने का उल्लेख है।
मामले में आगे कानूनी प्रक्रिया पर रहेगी नजर
NIA अदालत के फैसले के बाद दोषी ठहराए गए लोगों के पास ऊपरी अदालत में अपील का कानूनी विकल्प मौजूद है। वहीं, कांग्रेस ने भी फैसले के व्यापक पहलुओं पर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर आगे कदम उठाने की बात कही है। ऐसे में झीरम मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही के साथ-साथ कांग्रेस की ओर से उठाए जाने वाले कानूनी कदमों पर भी नजर रहेगी। मामले की जांच और कथित व्यापक साजिश को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं।
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