T20 World Cup 2026
T20 World Cup 2026: भारतीय क्रिकेट टीम ने हाल ही में 8 मार्च 2026 को न्यूजीलैंड को फाइनल में 96 रनों से शिकस्त देकर तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया। जहां पूरा देश इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहा है, वहीं कुछ ऐसे खिलाड़ी भी थे जो इस सफर का हिस्सा बनते-बनते रह गए। विकेटकीपर बल्लेबाज जितेश शर्मा उनमें से एक प्रमुख नाम हैं। टूर्नामेंट के लिए चयन न होने और उसी दौरान निजी जीवन में आए बड़े संकट को लेकर अब जितेश ने चुप्पी तोड़ी है।
जब टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय स्क्वाड का ऐलान हुआ, तो जितेश शर्मा का नाम उसमें शामिल नहीं था। समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए जितेश ने स्वीकार किया कि उस समय वे काफी आहत थे। उन्होंने कहा, “जब मुझे पता चला कि मेरा चयन नहीं हुआ है, तो मैं निराश था। आखिर मैं भी एक इंसान हूं और देश के लिए वर्ल्ड कप खेलने का सपना हर किसी का होता है। मुझे बुरा लगा, लेकिन समय के साथ मैंने खुद को संभाला।” जितेश का यह बयान दर्शाता है कि पेशेवर उपलब्धियों और व्यक्तिगत भावनाओं के बीच संतुलन बनाना किसी भी एथलीट के लिए कितना चुनौतीपूर्ण होता है।
जितेश के लिए यह समय केवल पेशेवर मोर्चे पर ही कठिन नहीं था, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 1 फरवरी 2026 को उनके पिता का निधन हो गया। जितेश ने भावुक होते हुए बताया, “उस कठिन समय में मुझे अपने परिवार के साथ सात दिनों तक रहने का मौका मिला। तब मुझे अहसास हुआ कि वर्ल्ड कप खेलने से कहीं ज्यादा उस वक्त मेरे पिताजी और परिवार को मेरी जरूरत थी।” उन्होंने आगे कहा कि इस घटना के बाद उनके मन में वर्ल्ड कप टीम में न होने का कोई पछतावा या नाराजगी नहीं रही। उनके लिए पिता की सेवा और परिवार की संभल सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई।
अपने पिता को याद करते हुए जितेश ने कहा कि पिता को खोने का दर्द कुछ दिनों बाद और गहराई से महसूस होता है। उन्होंने कहा, “जब आप पिता को खो देते हैं, तब आपको समझ आता है कि अब आप घर के बड़े बेटे हैं और सभी महत्वपूर्ण फैसले लेने की जिम्मेदारी आपकी है।” जितेश ने यह भी साझा किया कि वे अपने पिता के सामने कभी कमजोर नहीं पड़ना चाहते थे। उन्हें विश्वास है कि अगर उनके पिता आज जीवित होते, तो वे उन्हें अभ्यास पर जाने और खेल पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करते।
इसी मेगा इवेंट के दौरान भारतीय स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता का भी निधन हो गया था, जिसके चलते उन्हें बीच टूर्नामेंट से घर लौटना पड़ा था। जितेश ने रिंकू के साहस की सराहना करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि रिंकू ने भी वही महसूस किया होगा जो मैंने किया। अपने पिता को खोने के बाद दोबारा मैदान पर उतरना और देश के लिए खेलना बहुत बड़ी बात है। यह किसी भी खिलाड़ी के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं होता।” जितेश का मानना है कि रिंकू की वापसी उनके मानसिक साहस और पेशेवर प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
भले ही जितेश शर्मा 2026 के इस ऐतिहासिक टी20 वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं बन पाए, लेकिन उनके हौसले अब भी बुलंद हैं। पिता की सीख और परिवार की जिम्मेदारी ने उन्हें मानसिक रूप से और अधिक परिपक्व बना दिया है। फिलहाल वे घरेलू क्रिकेट और आगामी टूर्नामेंट्स के लिए कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। भारतीय क्रिकेट फैंस को उम्मीद है कि यह प्रतिभाशाली विकेटकीपर बल्लेबाज जल्द ही नीली जर्सी में वापसी करेगा और अपने पिता के अधूरे सपनों को मैदान पर पूरा करेगा।
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