JSSC CGL Passed Candidates : झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के बाद परीक्षा में सफल होकर नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों में नाराजगी और निराशा बढ़ गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता वाली कैबिनेट के फैसले के बाद चयनित उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की थी। अब अचानक परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है और कई अभ्यर्थियों को नौकरी जाने का डर सता रहा है।
सरकार ने परीक्षा रद्द करने का लिया बड़ा फैसला
छात्रों के लगातार आंदोलन और परीक्षा में कथित पेपर लीक व अनियमितताओं के आरोपों के बीच झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी घोषणा की। इसके साथ ही आउटसोर्सिंग एजेंसी TDPL की ओर से वर्ष 2014 से आयोजित कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों को भी रद्द करने की जानकारी दी गई। सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अलग समिति बनाने का निर्णय भी लिया है।
अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनेगी परीक्षा सुधार समिति
सरकार ने भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए परीक्षा सुधार समिति गठित करने का फैसला किया है। इस समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल करेंगे। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में मौजूद कमियों की पहचान करना और उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक सुधार लागू करना है। हालांकि, सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि सुधार की प्रक्रिया के लिए उनकी चयन प्रक्रिया को खत्म करना उचित नहीं है।
सफल अभ्यर्थियों ने बताया अपना दर्द
JSSC-CGL में सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका किसी कथित गड़बड़ी या पेपर लीक से कोई संबंध नहीं था। उनका दावा है कि उन्होंने मेहनत और निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से परीक्षा पास की और इसके बाद नियुक्ति प्राप्त की। कुछ अभ्यर्थियों के अनुसार उन्होंने नौकरी मिलने के बाद अपनी पुरानी नौकरियां तक छोड़ दी थीं। अब परीक्षा रद्द होने से वे खुद को अचानक बेरोजगारी की स्थिति में पा रहे हैं।
अदालत के आदेशों का भी दिया हवाला
चयनित उम्मीदवारों का कहना है कि उनकी नियुक्ति न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद हुई थी। उनका दावा है कि हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले के बाद उन्हें नियुक्त किया गया था और मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी स्थिति स्पष्ट हो चुकी थी। ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले को वे अपने लिए बड़ा झटका मान रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके अधिकारों और भविष्य पर फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार होना चाहिए था।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे सफल छात्र
सफल अभ्यर्थियों का तर्क है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में अनियमितता हुई है तो उसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि सरकार को CBI जैसी एजेंसी से जांच करानी चाहिए थी और जो लोग दोषी पाए जाते, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती। उनके मुताबिक कुछ लोगों की कथित गलती की सजा सभी सफल अभ्यर्थियों को देना उचित नहीं है।
दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी
परीक्षा रद्द होने के फैसले से नाराज अभ्यर्थियों ने संकेत दिया है कि वे कानूनी लड़ाई का रास्ता अपनाएंगे। उनका कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए अदालत का दरवाजा फिर खटखटा सकते हैं। सफल छात्रों का दावा है कि सरकार के फैसले से उन अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है जिन्होंने पूरी प्रक्रिया के दौरान मेहनत की और चयन हासिल किया था।
आखिर क्या था JSSC-CGL विवाद?
JSSC-CGL परीक्षा को लेकर झारखंड में पिछले कई दिनों से छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा था। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर कथित धांधली और पेपर लीक के आरोप लगाए थे। रांची में छात्रों ने तिरंगा यात्रा भी निकाली थी और मामले की CBI जांच की मांग को लेकर आमरण अनशन किया था। आंदोलन के दौरान छात्रों ने सरकार पर निष्पक्ष जांच कराने का दबाव बनाया।
सरकार के फैसले से विवाद और बढ़ा
छात्रों के दबाव के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द करने की मांग स्वीकार कर ली, लेकिन इस फैसले ने सफल अभ्यर्थियों के बीच नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ आंदोलनकारी छात्र परीक्षा रद्द करने को अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं, वहीं सफल उम्मीदवार इसे अपने भविष्य के साथ अन्याय बता रहे हैं। अब सरकार के सामने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ चयनित अभ्यर्थियों की चिंताओं का समाधान करना भी बड़ी चुनौती है।
Read More : Iraq Kurdistan Drone Attack: PM के दफ्तर पर ड्रोन हमला, ईरान पर आरोप; तेहरान ने किया इनकार