Kailash Mansarovar Yatra 2026: शिव भक्तों और आध्यात्मिक साधकों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2026 के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस वर्ष यह पवित्र तीर्थयात्रा जून के महीने में शुरू होगी और अगस्त के अंत तक जारी रहेगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रा का आयोजन चीनी सरकार के साथ पूर्ण समन्वय और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। कोरोना महामारी और सीमावर्ती गतिरोध के कारण लंबे समय तक बाधित रहने के बाद, अब यह यात्रा अपने पुराने वैभव और उत्साह के साथ पुनः आयोजित की जा रही है।

लिपुलेख और नाथू ला: दो प्रसिद्ध मार्गों से होगा सफर
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस साल तीर्थयात्री दो अलग-अलग मार्गों से कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे। पहला मार्ग उत्तराखंड राज्य में स्थित ‘लिपुलेख दर्रा’ है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीनता के लिए जाना जाता है। दूसरा मार्ग सिक्किम राज्य का ‘नाथू ला’ दर्रा है, जो सड़क मार्ग से जुड़ा होने के कारण अपेक्षाकृत कम कठिन माना जाता है। सरकार ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए जत्थों का निर्धारण किया है। लिपुलेख दर्रे से 50-50 यात्रियों के कुल 10 जत्थे रवाना होंगे, जबकि नाथू ला मार्ग से भी समान संख्या में 10 जत्थों को यात्रा पर भेजा जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया और चयन की पारदर्शी विधि
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने के इच्छुक नागरिकों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए समर्पित वेबसाइट kmy.gov.in पर जाकर 19 मई 2026 तक पंजीकरण कराया जा सकता है। यात्रियों का चयन पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित ‘रैंडम ड्रा’ प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें लिंग-संतुलन और निष्पक्षता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। आवेदकों को किसी भी प्रकार का भौतिक पत्र या फैक्स भेजने की आवश्यकता नहीं है; वे वेबसाइट के माध्यम से ही अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पा सकते हैं और सुझाव दर्ज कर सकते हैं।
धार्मिक महत्व और पिछले 5 वर्षों का संघर्ष
तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। यह यात्रा न केवल हिंदुओं के लिए बल्कि जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी मोक्ष का मार्ग मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो यह यात्रा पिछले पांच वर्षों से काफी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजरी है। 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण इसे पहली बार स्थगित किया गया था। इसके बाद, पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच पैदा हुए सैन्य तनाव के कारण सुरक्षा कारणों से इसे लंबे समय तक बंद रखना पड़ा। पिछले वर्ष संबंधों में आंशिक सुधार के बाद इसे पुनः शुरू किया गया, जो अब 2026 में पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रही है।
सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का कड़ा पालन
चूंकि यह यात्रा अत्यधिक ऊंचाई और दुर्गम रास्तों से होकर गुजरती है, इसलिए सरकार ने यात्रियों के स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर सख्त नियम बनाए हैं। दिल्ली में शुरुआती स्वास्थ्य जांच के बाद ही यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाती है। विदेश मंत्रालय ने तीर्थयात्रियों को सलाह दी है कि वे शारीरिक रूप से फिट रहें और वेबसाइट पर दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का बारीकी से अध्ययन करें। यह तीर्थयात्रा न केवल एक धार्मिक यात्रा है, बल्कि भारत और चीन के बीच कूटनीतिक और सांस्कृतिक सेतु के रूप में भी कार्य करती है। 19 मई की समय सीमा के भीतर आवेदन करने वाले श्रद्धालु इस साल महादेव के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं।
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