Kailash Vijayvargiya
Kailash Vijayvargiya: मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने तीखे तेवरों और विवादित बयानबाजी के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनके गृह क्षेत्र इंदौर से जुड़ा है, जहाँ एक पत्रकार द्वारा जनहित के मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर मंत्री जी अपना आपा खो बैठे। विजयवर्गीय ने न केवल सवाल का जवाब देने से इनकार किया, बल्कि पत्रकार के खिलाफ अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल भी किया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिसके बाद सरकार और मंत्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
यह पूरा विवाद इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में फैली एक गंभीर स्वास्थ्य त्रासदी से शुरू हुआ। दूषित पानी पीने के कारण इस क्षेत्र में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह क्षेत्र कैलाश विजयवर्गीय के अपने विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ के अंतर्गत आता है। इतनी बड़ी मानवीय क्षति के बाद जब मीडिया ने उनसे जवाबदेही और राहत कार्यों पर सवाल किया, तो मंत्री का रवैया संवेदनशीलता के बजाय आक्रामकता भरा नजर आया।
घटना के दौरान जब एनडीटीवी के पत्रकार ने जल संकट और मौतों पर सवाल किया, तो विजयवर्गीय बिफर पड़े। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा, “छोड़ो यार तुम फोकट के प्रश्न मत पूछो।” जब पत्रकार ने उनके शब्दों के चयन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि “कैलाश जी, आप ढंग से बात नहीं कर रहे हैं, शब्दों का चयन सही करिए,” तब भी मंत्री ने अपना लहजा नहीं बदला। इतना ही नहीं, उनके साथ मौजूद एक पार्षद ने भी पत्रकार के साथ बदतमीजी की। यह व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता पर चोट के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है और भाजपा सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर वीडियो साझा करते हुए इसे “शर्मनाक” करार दिया। कांग्रेस नेतृत्व ने आरोप लगाया कि एक तरफ जनता दूषित पानी पीकर मर रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता के नशे में चूर मंत्री “गुंडों” जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है।
चतरफा आलोचना और जन आक्रोश को देखते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने अंततः इस मामले पर खेद प्रकट किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर स्पष्टीकरण देते हुए लिखा कि वे पिछले कई घंटों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में स्थिति को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। विजयवर्गीय ने कहा, “मेरे क्षेत्र के लोग पीड़ित हैं और कुछ अपनों को खोने का गहरा दुख है। इसी मानसिक दबाव और दुख की स्थिति में मेरे मुंह से गलत शब्द निकल गए, जिसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूं।” उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, वे चैन से नहीं बैठेंगे।
भले ही मंत्री ने माफी मांग ली हो, लेकिन इंदौर की इस घटना ने शहरी प्रशासन और पेयजल आपूर्ति की पोल खोल दी है। 10 लोगों की जान जाना कोई छोटी घटना नहीं है। अब स्थानीय प्रशासन और सरकार पर यह दबाव है कि वे न केवल दोषियों पर कार्रवाई करें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि भविष्य में इंदौर की जनता को इस तरह की जानलेवा जल त्रासदी का सामना न करना पड़े।
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