Kali Mother Mary Row
Kali Mother Mary Row: मुंबई के चेंबूर इलाके में स्थित एक मंदिर में देवी काली माता की मूर्ति को ईसाई समुदाय की मदर मैरी की तरह सजाने का एक विवादित मामला सामने आया है। मूर्ति को क्रॉस पहनाया गया, और मंदिर के अंदरूनी हिस्से को लाल कपड़े से सजाया गया, जिसके बाद यह घटनाक्रम वीडियो वायरल होने से सार्वजनिक हो गया। इस धार्मिक स्वरूप परिवर्तन को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मंदिर के पुजारी को गिरफ्तार कर लिया है। जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें एक युवक मंदिर के पास पहुँचकर वीडियो शूट कर रहा है। वह काली माता के मंदिर की ओर बढ़ता है, जिसके पट बंद हैं। जाली के माध्यम से वह दिखाता है कि काली माता की मूर्ति को मदर मैरी की तरह वेशभूषा पहनाई गई है और उनका श्रृंगार भी वैसा ही किया गया है, जैसा कि सामान्य तौर पर मदर मैरी की मूर्तियों का होता है।
वायरल वीडियो में देवी काली माता की मूर्ति को मदर मैरी जैसा सजाया गया है, जिसमें कई ऐसी चीजें शामिल हैं जो सामान्य हिंदू मंदिरों से अलग, बल्कि चर्च की याद दिलाती हैं:
काली माता के सिर पर क्राउन (ताज) रखा गया है।
मंदिर के अंदर लाल कपड़ा लगाया गया है।
मूर्ति के चारों ओर चर्च जैसी लाइटिंग की गई है।
सामान्य हिंदू पूजा में इस्तेमाल होने वाले दीयों की जगह, मूर्ति के आगे मोमबत्तियां जलती नजर आ रही हैं।
सबसे विवादास्पद यह है कि काली माता को गोद में बच्चा लिए दिखाया गया है, जो मदर मैरी और बाल यीशु के चित्रण के समान है।
यह अनूठा और विवादास्पद श्रृंगार हिंदू और ईसाई दोनों समुदायों के भक्तों के बीच confusion (भ्रम) और आक्रोश का कारण बन गया है।
वीडियो वायरल होने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मंदिर के पुजारी रमेश को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में पुजारी ने एक अजीबोगरीब दावा किया। उसने कहा, “काली माता ने मुझे सपना दिया और कहा कि मेरा मदर मैरी के जैसा श्रृंगार करो।” पुजारी ने अपने इस कृत्य को ईश्वरीय आदेश का पालन बताया।
पुलिस ने पुजारी रमेश के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। फिलहाल, पुजारी 2 दिन की पुलिस रिमांड में है और पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है।
इस घटना ने मुंबई के धार्मिक और सामाजिक हलकों में तीव्र बहस छेड़ दी है। कई लोग पुजारी के कृत्य को धार्मिक एकता का प्रयास मान रहे हैं, वहीं बहुसंख्यक लोगों ने इसे धार्मिक प्रतीकों का अनादर और भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य बताया है।
पुलिस अब यह जाँच कर रही है कि क्या पुजारी ने यह श्रृंगार सचमुच व्यक्तिगत आस्था के चलते किया था, या इसके पीछे किसी तरह के जानबूझकर विवाद पैदा करने का इरादा था। पुजारी का सपना वाला बयान कानूनी जाँच के दायरे में है, और पुलिस रिमांड के दौरान सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
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