Kanha Tiger Reserve
Kanha Tiger Reserve: चीता प्रोजेक्ट की शानदार सफलता के बाद, मध्य प्रदेश एक बार फिर वाइल्डलाइफ कन्जर्वेशन (वन्यजीव संरक्षण) के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करने की तैयारी कर रहा है। राज्य सरकार ने सालों पहले मध्य प्रदेश से विलुप्त हो चुकी जंगली भैंसों (Wild Buffaloes) को उनके पुराने प्राकृतिक आवास में वापस लाने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। यह पहल न केवल राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को मजबूती देगी, बल्कि स्थानीय ईकोसिस्टम और जैव विविधता को भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत में बड़े शाकाहारी जीवों के संरक्षण की दिशा में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
इस महत्वपूर्ण पहल के तहत, असम के मानस टाइगर रिजर्व से जंगली भैंसों को मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित कान्हा टाइगर रिजर्व में बसाया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को पत्र लिखकर जंगली भैंस और एक सींग वाले गेंडे मध्य प्रदेश भेजने का अनुरोध किया है। इसके बदले में, मध्य प्रदेश सरकार बाघ, तेंदुए या अन्य वन्यजीवों को असम को देने के लिए तैयार है, जो वन्यजीव विनिमय (Wildlife Exchange) की नीति को दर्शाता है।
इस योजना को नवंबर 2024 में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) द्वारा मंजूरी दी गई थी। इस मंजूरी के तहत, कान्हा टाइगर रिजर्व में कुल 50 जंगली भैंसों को बसाने की अनुमति दी गई है। यह ट्रांसलोकेशन केवल असम से नहीं, बल्कि असम, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र राज्यों से होगा। योजना के अनुसार, असम से 20, जबकि छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से 15-15 जंगली भैंस लाने का प्रस्ताव है। यह व्यापक ट्रांसलोकेशन जंगली भैंसों की आबादी में आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
वाइल्डलाइफ एक्स्पर्ट्स का मानना है कि कान्हा टाइगर रिजर्व जंगली भैंसों के लिए सबसे उपयुक्त और सर्वोत्तम क्षेत्र है। इस रिजर्व का विशाल घास का मैदान, वेटलैंड (आर्द्रभूमि), पर्याप्त जल की उपलब्धता और पहले से स्थापित मजबूत संरक्षण व्यवस्था इस प्रजाति के पुनर्स्थापन के लिए आदर्श मानी जाती है। वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कान्हा टाइगर रिजर्व में करीब 200 जंगली भैंसों को सहारा देने की क्षमता है।
इस परियोजना की शुरुआत पहले चरण में 6 जंगली भैंसों के एक छोटे समूह से होगी। इस समूह में चार मादा, एक युवा नर और एक वयस्क नर शामिल होंगे। इस समूह का उद्देश्य एक स्वस्थ और प्रजनन योग्य शुरुआती आबादी स्थापित करना है। इसके बाद, अगले 13 सालों तक हर तीन साल में 4 और भैंसों को जोड़ा जाएगा, ताकि बेहतर जीन पूल और आनुवंशिक विविधता बनी रहे। उम्मीद है कि यह झुंड समय के साथ प्रजनन करेगा और आसपास के जंगलों और सेंचुरियों में भी फैल सकता है।
मानस टाइगर रिजर्व से कान्हा टाइगर रिजर्व की दूरी करीब 1600 किलोमीटर है। यह दूरी भारत में सबसे लंबी वन्यजीव ट्रांसलोकेशन दूरी में से एक है, जो परिवहन के मामले में एक बड़ी चुनौती है। परिवहन का तरीका अभी अंतिम रूप से तय नहीं किया गया है। ट्रांसलोकेशन से पहले, सभी जंगली भैंसों की जेनेटिक और स्वास्थ्य जांच की जाएगी ताकि किसी तरह की बीमारी या घरेलू भैंसों से हाइब्रिडाइजेशन (संकरण) का खतरा न रहे।
मध्य प्रदेश में जंगली भैंसें कभी मंडला, बालाघाट, अमरकंटक और सतपुड़ा के क्षेत्रों में पाई जाती थीं। उनकी विलुप्ति के मुख्य कारण थे: ब्रिटिश काल में अधिक शिकार, आजादी के बाद अवैध शिकार, प्राकृतिक आवासों का खत्म होना, और घरेलू भैंसों से संकरण। इन्हें आखिरी बार 1979 में पन्ना नेशनल पार्क में देखा गया था।
वैश्विक स्तर पर जंगली भैंसों की संख्या 3,000 से कम मानी जाती है, इसलिए इन्हें गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति (Critically Endangered) माना जाता है। भारत में एक सींग वाले गेंडों की कुल आबादी करीब 3,323 है, जिनमें से 3,000 अकेले असम में पाए जाते हैं।
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