Mobile Tower in Kanker
Mobile Tower in Kanker: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में अब डिजिटल क्रांति की नई लहर आने वाली है। राज्य सरकार ने कांकेर जिले के उन दूरस्थ और आदिवासी बहुल अंचलों में 82 नए मोबाइल टावर लगाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है, जो दशकों से संचार सुविधाओं के लिए तरस रहे थे। यह पहल न केवल इन क्षेत्रों को दुनिया से जोड़ेगी, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए विकास के नए द्वार भी खोलेगी। लंबे समय से नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे इन गांवों में अब लोग पहली बार हाई-स्पीड इंटरनेट और बिना बाधा वाली मोबाइल कॉलिंग का अनुभव कर सकेंगे। यह कदम बस्तर संभाग की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर बदलने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूरी तत्परता से काम कर रही है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि जब तक तकनीक और इंटरनेट की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक नहीं होगी, तब तक समावेशी विकास का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता। 82 मोबाइल टावरों की यह बड़ी परियोजना इसी विजन का हिस्सा है। बेहतर कनेक्टिविटी होने से न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि शासन की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी अब सीधे पात्र हितग्राहियों तक बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के डिजिटल माध्यम से पहुँच सकेगा।
कांकेर के अंदरूनी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए मोबाइल नेटवर्क आज भी एक लग्जरी जैसा है। वर्तमान में स्थिति यह है कि एक सामान्य फोन कॉल करने या इंटरनेट का उपयोग करने के लिए ग्रामीणों को ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता है या फिर कई किलोमीटर का सफर तय कर शहर की ओर जाना पड़ता है। इस संचार बाधा के कारण आपातकालीन स्थितियों, जैसे चिकित्सा सहायता या पुलिस मदद बुलाने में भारी देरी होती है। अब टावरों के जाल बिछ जाने से संचार व्यवस्था अभेद्य होगी, जिससे न केवल आम जनजीवन सुगम होगा बल्कि नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों के लिए भी सूचनाओं का आदान-प्रदान करना आसान हो जाएगा।
एक समय था जब नक्सली संगठन इन क्षेत्रों में विकास कार्यों के सबसे बड़े विरोधी थे। वे संचार प्रणालियों को बाधित करने के लिए मोबाइल टावरों में आगजनी करते थे और केबल काट देते थे ताकि सुरक्षा बल और ग्रामीण आपस में संपर्क न कर सकें। इस वजह से कई टेलीकॉम कंपनियों ने इन इलाकों में काम करने से हाथ खींच लिए थे। हालांकि, हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और नक्सली गतिविधियों में आई भारी गिरावट के बाद अब सरकार ने इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का साहसिक निर्णय लिया है। अब नक्सलियों के डर के बजाय विकास और तकनीक की जीत हो रही है।
डिजिटल बुनियादी ढांचे के मजबूत होने से इन क्षेत्रों में विकास की नई राहें खुलेंगी। ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर टेलीमेडिसिन (वीडियो कॉल पर डॉक्टर से परामर्श) तक की सुविधाएं अब आदिवासी बच्चों और बुजुर्गों को अपने गांव में ही मिल सकेंगी। सरकारी पोर्टलों तक पहुंच आसान होने से बैंकिंग सेवाओं और राशन कार्ड जैसे कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार को विश्वास है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद कांकेर के सबसे पिछड़े इलाकों में भी सुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। यह संचार क्रांति आने वाले समय में अबूझमाड़ जैसे इलाकों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगी।
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