छत्तीसगढ़

Phulo Devi Netam: राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम ने खेत में चलाया ट्रैक्टर, श्रम और सादगी का संदेश

Phulo Devi Netam: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सत्ता और पद के अहंकार से दूर, जमीन से जुड़ाव की नई मिसाल पेश करती है। राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम फरसगांव ब्लॉक के ग्राम अलोर स्थित अपने पैतृक खेतों में एक आम किसान की तरह ट्रैक्टर चलाकर जुताई करती नजर आईं। कड़कड़ाती धूप के बीच उन्होंने घंटों खेत में पसीना बहाया। वर्तमान में प्रदेश में धान की दूसरी फसल (रबी सीजन) की तैयारियां जोरों पर हैं, और इसी कड़ी में सांसद ने खुद कमान संभालते हुए खेतों को तैयार किया। उनका यह वीडियो और तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

“श्रम करने में कैसी शर्म?”: राजनीति के बीच किसानी का जज्बा

जब वहां मौजूद लोगों और मीडिया ने उनसे पूछा कि इतने बड़े संवैधानिक पद पर होने के बावजूद वे खुद ट्रैक्टर क्यों चला रही हैं, तो फूलो देवी नेताम ने बड़ी ही सादगी से जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “हमारा परिवार हमेशा से मिट्टी से जुड़ा रहा है। राजनीति मेरे लिए सेवा का माध्यम है, लेकिन किसानी मेरी पहचान है। राजनीति में आने से पहले भी हम खेती करते थे और आज भी अपने खेतों में सबके साथ मिलकर काम करने में मुझे गर्व महसूस होता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अपना काम खुद करने से कोई व्यक्ति छोटा नहीं होता, बल्कि समाज में श्रम का सम्मान बढ़ता है।

अलोर से दिल्ली तक का सफर, लेकिन जड़ें आज भी गांव में

सांसद का मानना है कि किसान के लिए उसका खेत ही उसकी सबसे बड़ी संपत्ति और कार्यस्थल है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने गांव के लोगों और परिवार के साथ खेतों में काम करके जो सुकून और खुशी मिलती है, वह दिल्ली की चकाचौंध में भी नहीं है। फूलो देवी नेताम का यह व्यवहार यह दर्शाता है कि पद चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए, इंसान को अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए। उनके इस जुड़ाव को देखकर स्थानीय ग्रामीण भी काफी उत्साहित नजर आए।

सिर्फ ट्रैक्टर ही नहीं, रोपा और पत्तल तोड़ते भी दिख चुकी हैं सांसद

यह पहली बार नहीं है जब फूलो देवी नेताम का ऐसा जमीनी अंदाज दुनिया के सामने आया हो। बस्तर संभाग की राजनीति में सक्रिय रहने वाली नेताम को अक्सर उनके सादगी भरे कार्यों के लिए जाना जाता है। इससे पहले भी उन्हें कभी मानसून के दौरान घुटनों तक भरे पानी में धान का रोपा लगाते हुए देखा गया है, तो कभी वे आदिवासी महिलाओं के साथ जंगलों में जाकर दोना-पत्तल बनाने के लिए पत्तियां तोड़ते हुए नजर आई हैं। उनके लिए वीआईपी कल्चर से ज्यादा महत्वपूर्ण आम जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना है।

युवाओं के लिए प्रेरणा: आत्मनिर्भरता और मेहनत का पाठ

सांसद के इस कदम की गांव और आस-पास के क्षेत्रों में खूब चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि एक सांसद को अपने बीच इस तरह काम करते देख उन्हें बहुत गर्व होता है। स्थानीय युवाओं के लिए यह एक बड़ा संदेश है कि मेहनत करने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए। आज के दौर में जब युवा खेती-किसानी से दूर भाग रहे हैं, तब फूलो देवी नेताम जैसी नेत्री उन्हें आत्मनिर्भरता और शारीरिक श्रम के प्रति प्रेरित कर रही हैं। उनका यह कदम न केवल किसानों के मनोबल को बढ़ाता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि कृषि ही हमारी अर्थव्यवस्था की असली बुनियाद है।

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