Kanker News
Kanker News: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतर्गत आने वाले चारामा वन परिक्षेत्र में जंगली जानवरों की बढ़ती सक्रियता ने स्थानीय निवासियों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में तारसगांव के पास दिन के उजाले में दो विशालकाय भालुओं को खेतों में खुलेआम घूमते हुए देखा गया। चूँकि यह इलाका घनी आबादी और रिहायशी बस्तियों से सटा हुआ है, इसलिए ग्रामीणों में जान-माल के नुकसान का डर बना हुआ है। भोजन और पानी की तलाश में जंगलों से निकलकर शहरी और ग्रामीण बस्तियों की ओर रुख कर रहे ये वन्यजीव अब एक गंभीर संकट बन चुके हैं।
आमतौर पर जंगली जानवर सूर्यास्त के बाद ही आबादी वाले क्षेत्रों का रुख करते हैं, लेकिन तारसगांव की घटना ने नई चिंता पैदा कर दी है। यहाँ भालुओं को दिन के समय खेतों में विचरण करते देखा गया, जिससे खेती-किसानी के काम में लगे मजदूरों और किसानों के बीच अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों का कहना है कि वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण ये जानवर अब सीधे इंसानी बस्तियों में घुस रहे हैं। कांकेर जिले में भालू और तेंदुए जैसे खतरनाक जानवरों का दिखना अब एक आम लेकिन जानलेवा सिलसिला बन गया है।
जंगली जानवरों का यह बढ़ता दखल केवल दिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब ये हिंसक भी हो रहे हैं। हाल ही में चारामा के ही तेलगुड़ा गाँव में एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जहाँ दो भालुओं ने एक महिला पर उस वक्त हमला कर दिया जब वह सुबह अपने घर के बाहर झाड़ू लगा रही थी। इस अचानक हुए हमले में महिला के सिर, कमर और पीठ पर गहरे जख्म आए हैं। गंभीर रूप से घायल महिला वर्तमान में चारामा अस्पताल में उपचाराधीन है। इस घटना के बाद से क्षेत्र के लोगों में वन विभाग के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
लगातार बढ़ते हमलों और रिहायशी इलाकों में जानवरों की आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने सख्त गाइडलाइन जारी की है। विभाग ने ग्रामीणों को हिदायत दी है कि वे शाम 6 बजे के बाद घर से बाहर न निकलें। विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतने को कहा गया है। इसके साथ ही, ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अपने पालतू जानवरों (गाय, बकरी आदि) को असुरक्षित स्थानों पर न बांधें, क्योंकि इनकी गंध से जंगली जानवर और अधिक आकर्षित होते हैं।
कांकेर में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और जन प्रतिनिधियों ने मांग की है कि वन विभाग केवल चेतावनी जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि इन जानवरों को सुरक्षित रूप से पकड़ने या उन्हें घने जंगलों की ओर खदेड़ने के लिए पिंजरे और गश्ती टीमों की व्यवस्था करे। लोगों का कहना है कि जब तक भालुओं और तेंदुओं का शहरी क्षेत्रों में आना बंद नहीं होगा, तब तक किसी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहेगी।
क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए अब ड्रोन और अन्य तकनीकी संसाधनों के उपयोग पर चर्चा हो रही है। वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा रहे हैं और जानवरों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। वर्तमान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से धैर्य रखने तथा किसी भी परिस्थिति में वन्यजीवों को स्वयं छेड़ने या उकसाने से बचने का आग्रह किया है।
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