Kanpur Crime: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से खाकी को कलंकित करने वाली एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है। सचेड़ी थाना क्षेत्र में एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ न केवल अपहरण की वारदात को अंजाम दिया गया, बल्कि एक दरोगा ने अपने साथी के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। रक्षक के भक्षक बनने की इस घटना ने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस प्रशासन अब बैकफुट पर है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा कर रहा है, जबकि घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश व्याप्त है।
घटना सोमवार की रात करीब 10 बजे की है। पीड़िता के परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 14 वर्षीय किशोरी घर से बाहर शौच के लिए निकली थी। तभी एक स्कॉर्पियो कार और बाइक सवार कुछ युवकों ने उसे घेर लिया। आरोप है कि आरोपियों ने जबरन उसे स्कॉर्पियो में खींच लिया और वहां से फरार हो गए। सुनसान इलाके में करीब दो घंटे तक कार के भीतर ही नाबालिग के साथ बारी-बारी से दरिंदगी की गई। इस घृणित कार्य को अंजाम देने के बाद आरोपी पीड़िता को जान से मारने की धमकी देते हुए उसके घर के पास फेंक कर फरार हो गए।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब जांच के दौरान दुष्कर्म में एक पुलिसकर्मी की संलिप्तता की पुष्टि हुई। पीड़िता ने जिस शख्स की पहचान की, वह कोई और नहीं बल्कि स्थानीय भीमसेन चौकी का इंचार्ज अमित मौर्या था। दरोगा ने अपने एक साथी शिवबरन के साथ मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। जिस क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी दरोगा के कंधों पर थी, उसी क्षेत्र में उसने अपनी ही वर्दी को शर्मसार किया। वर्तमान में आरोपी दरोगा फरार है, जबकि उसके साथी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
वारदात के बाद जब पीड़िता का परिवार न्याय की गुहार लगाने थाने पहुँचा, तो वहां उन्हें सहयोग के बजाय टरकाया गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मी का नाम सामने आते ही पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की और समय पर एफआईआर दर्ज नहीं की। वरिष्ठ अधिकारियों ने इस लापरवाही का कड़ा संज्ञान लिया है। सचेड़ी थानाध्यक्ष विक्रम सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि पीड़िता द्वारा आरोपी दरोगा की पहचान किए जाने के बावजूद उन्होंने ‘अज्ञात’ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और कार्रवाई में ढिलाई बरती।
पीड़िता के भाई ने बताया कि उसकी बहन बदहवास हालत में घर लौटी और रोते हुए आपबीती सुनाई। उसने बताया कि आरोपी दरोगा और उसके साथियों ने धमकी दी थी कि यदि किसी को कुछ बताया तो पूरे परिवार को खत्म कर देंगे। परिजनों का कहना है कि पुलिस के पास जाने पर उन्हें चौकी से वापस भेज दिया गया था। फिलहाल, नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है। संयुक्त पुलिस आयुक्त आशुतोष कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फरार दरोगा की गिरफ्तारी के लिए चार विशेष टीमों का गठन किया है और सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
इस घटना ने कानपुर में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। जब कानून का रखवाला ही अपराधी बन जाए, तो आम जनता किससे न्याय की उम्मीद करे? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा है कि आरोपी दरोगा अभी तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि अमित मौर्या को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और उस पर ऐसी कार्रवाई होगी जो एक नजीर बनेगी। समाज अब यह देख रहा है कि पुलिस अपने ही विभाग के ‘दागी’ सदस्य को कितनी जल्दी सजा दिला पाती है।
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