Kanpur police missing : उत्तर प्रदेश के कानपुर कमिश्नरेट में तैनात 53 पुलिसकर्मी अचानक लापता हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से किसी का कोई आधिकारिक अवकाश स्वीकृत नहीं है और न ही उनका परिवार या मोबाइल के ज़रिए कोई संपर्क हो पा रहा है। यह सभी जवान बिना पूर्व सूचना के ड्यूटी से गायब हैं, जिनके मोबाइल फोन बंद हैं और लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है।
कानपुर पुलिस प्रशासन ने इन लापता पुलिसकर्मियों के घरों पर नोटिस भेजकर जवाब माँगा, लेकिन किसी भी परिवार से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। दो बार नोटिस भेजे जा चुके हैं, इसके बावजूद 161 में से किसी भी पुलिसकर्मी ने कोई जवाब नहीं दिया। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अब इन सभी को ‘डिसलोकेट’ (कार्य से अनुपस्थित और स्थान अज्ञात) की श्रेणी में डालने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, लापता पुलिसकर्मियों में वे लोग भी शामिल हैं जो बीमारी के नाम पर छुट्टी पर गए थे, कुछ ने गैर जिलों में ड्यूटी की अनुमति ली थी, जबकि कुछ पर विभागीय कार्रवाई के बाद निगरानी रखी जा रही थी। लेकिन अब कोई भी संपर्क में नहीं है। कुछ जवान ड्यूटी पर भेजे जाने के बाद भी लौटकर नहीं आए। ऐसे में विभाग के पास अब इन्हें ‘डिसलोकेट’ घोषित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
इन गायब पुलिसकर्मियों में यातायात विभाग, पुलिस लाइन, और कार्यालयी कार्यों से जुड़े जवान शामिल हैं। सभी चारों जोनों से संबंधित हैं, जिनमें पूर्वी, पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी जोन के कर्मी भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, लापता कर्मी अलग-अलग रैंक और जिम्मेदारियों वाले हैं, लेकिन नियम के अनुसार उन्हें समय पर ड्यूटी पर लौटना अनिवार्य था, जो उन्होंने नहीं किया।
कानपुर कमिश्नरेट की ओर से यूपी पुलिस मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है। मुख्यालय को सूचित किया गया है कि इन सभी जवानों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि यह अनुशासनहीनता का गंभीर मामला है, और यदि समय रहते संपर्क नहीं हुआ तो निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
इस पूरे मामले ने कानपुर पुलिस प्रशासन को असहज स्थिति में डाल दिया है। सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी कैसे गायब हो सकते हैं और परिवार व विभाग से बिना सूचना के इतने समय तक अज्ञात रह सकते हैं? पुलिस महकमा अब कानूनी और विभागीय कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है, लेकिन यह मामला सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक अनुशासन पर भी कई सवाल खड़े करता है।
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