Kanshiram Bharat Ratna
Kanshiram Bharat Ratna: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम उठाते हुए बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को ‘भारत रत्न’ देने की मांग की है। राहुल गांधी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने दलितों और शोषितों के उत्थान में कांशीराम के योगदान को अविस्मरणीय बताया है। राहुल गांधी की इस मांग के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की सियासत में हलचल पैदा हो गई है। इसे आगामी चुनावों से पहले दलित मतदाताओं को साधने की कांग्रेस की एक बड़ी रणनीतिक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राहुल गांधी की इस मांग पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और राहुल गांधी को इतिहास का आइना दिखाते हुए सवाल पूछा कि आखिर 2006 में कांशीराम के निधन के बाद 2014 तक कांग्रेस सरकार ने उन्हें यह सम्मान क्यों नहीं दिया? दुबे ने याद दिलाया कि उस दौरान केंद्र में यूपीए की सरकार थी और बसपा प्रमुख मायावती का उन्हें समर्थन भी प्राप्त था। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए महापुरुषों के नाम का इस्तेमाल कर रही है, जबकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने हमेशा दलित नेताओं की उपेक्षा की है।
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए भारत के राजनीतिक इतिहास के पन्नों को पलटा। उन्होंने कहा कि देश के दो महापुरुषों—डॉ. भीमराव अंबेडकर और बाबू जगजीवन राम ने भारत को दोबारा बंटने से बचाया था। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि बाबू जगजीवन राम जैसे कद्दावर नेता और स्वतंत्रता सेनानी, जिन्होंने जीवन भर कांग्रेस की सेवा की, उन्हें अब तक भारत रत्न क्यों नहीं दिया गया? दुबे ने दावा किया कि जवाहरलाल नेहरू की नीतियों से अनुसूचित जाति के लोग सहमत नहीं थे, और जगजीवन राम ने अंततः कांग्रेस छोड़कर अपनी अलग राह चुनी थी क्योंकि कांग्रेस में दलितों के साथ न्याय नहीं हो रहा था।
बीजेपी सांसद ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान आपातकाल (इमरजेंसी) के कारण फखरुद्दीन अली अहमद को भारत रत्न देने की तैयारी थी, जिसका जगजीवन राम ने विरोध किया था। दुबे के अनुसार, राहुल गांधी को पहले इस बात का आत्ममंथन करना चाहिए कि उनकी पार्टी ने अपने ही महान नेताओं का सम्मान क्यों नहीं किया। उन्होंने राहुल गांधी की इस मांग को “मूर्खता की पराकाष्ठा” बताते हुए कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि फखरुद्दीन अली अहमद का विरोध करने की सजा बाबू जगजीवन राम को क्यों दी गई और उन्हें भारत रत्न से वंचित क्यों रखा गया।
सियासी बहस को आगे बढ़ाते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि दलित और वंचितों को आवाज देने के आधार पर सम्मान मिलना है, तो रामविलास पासवान जैसे नेताओं का योगदान भी अतुलनीय है। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस केवल चुनिंदा नामों के साथ राजनीति करना चाहती है। बीजेपी का मानना है कि कांशीराम का योगदान निश्चित रूप से बड़ा है, लेकिन कांग्रेस का अचानक उनके प्रति प्रेम जागना केवल राजनीतिक अवसरवाद है। इस मांग ने अब देश में दलित राजनीति के पुराने घावों और कांग्रेस के इतिहास पर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।
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