BJP MLA Bribe
BJP MLA Bribe: कर्नाटक की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय जनता पार्टी के विधायक डॉ. चंद्रू लमानी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। चंद्रू लमानी शिरहट्टी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। शनिवार को हुई इस नाटकीय गिरफ्तारी ने राज्य के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। लोकायुक्त पुलिस ने न केवल विधायक को हिरासत में लिया, बल्कि उनके दो निजी सचिवों (PA), मंजूनाथ वाल्मीकी और गुरुनाइक को भी सह-आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भ्रष्टाचार के मुद्दों पर चल रही बहस को और तेज करने वाली साबित हो रही है।
इस पूरे मामले का खुलासा क्लास-1 कॉन्ट्रैक्टर (प्रथम श्रेणी के ठेकेदार) विजय पुजारी की शिकायत के बाद हुआ। जानकारी के मुताबिक, लघु सिंचाई विभाग (Minor Irrigation Department) के तहत एक रिटेनिंग वॉल (प्रतिधारक दीवार) के निर्माण का कार्य चल रहा था। आरोप है कि इस परियोजना के सुचारू संचालन और बिलों के भुगतान के बदले विधायक चंद्रू लमानी ने ठेकेदार से 11 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की थी। पुजारी ने इस अवैध मांग के आगे झुकने के बजाय लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने विधायक को पकड़ने के लिए एक सटीक जाल (Trap) बिछाया।
लोकायुक्त पुलिस के निर्देशानुसार, ठेकेदार विजय पुजारी रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये नकद लेकर विधायक के पास पहुंचे। जैसे ही पुजारी ने विधायक और उनके सहयोगियों को नकदी सौंपी, पहले से तैयार बैठी लोकायुक्त की टीम ने धावा बोल दिया। रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद विधायक और उनके पीए के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा। पुलिस ने मौके पर ही नकदी जब्त कर ली और तीनों को हिरासत में ले लिया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान अब रसूखदार राजनेताओं तक पहुंच रहे हैं।
डॉ. चंद्रू लमानी 2023 के विधानसभा चुनाव में विजयी होकर आए थे और उन्हें राज्य में अनुसूचित जाति (SC) के एक प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है। उनकी गिरफ्तारी के बाद भाजपा के भीतर भी आंतरिक संकट खड़ा हो गया है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर सरकार और भाजपा की नैतिकता पर सवाल उठा रहा है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब लमानी विवादों में आए हों, लेकिन लोकायुक्त द्वारा प्रत्यक्ष गिरफ्तारी ने उनकी कानूनी और राजनीतिक मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में भाजपा को अपनी छवि बचाने के लिए कड़ी आंतरिक समीक्षा और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
लोकायुक्त पुलिस केवल इस एक घटना तक सीमित नहीं रहना चाहती। अधिकारियों का कहना है कि विधायक और उनके सहयोगियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में और भी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। पुलिस विभाग लघु सिंचाई विभाग के पिछले रिकॉर्ड और परियोजना अभिलेखों को खंगाल रहा है। लोकायुक्त ने जनता को आश्वासन दिया है कि वे सरकारी तंत्र में फैले ऐसे भ्रष्ट नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने और सार्वजनिक विश्वास बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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