Karnataka SC Reservation
Karnataka SC Reservation News: बेंगलुरु में आयोजित मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठक में एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी परिणाम वाला निर्णय लिया गया है। कर्नाटक सरकार ने राज्य में अनुसूचित जातियों (SC) के लिए आंतरिक आरक्षण (Internal Reservation) लागू करने को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले को सिद्धारमैया सरकार के सामाजिक न्याय के एजेंडे में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित इस मांग को पूरा करते हुए सरकार ने अनुसूचित वर्ग के भीतर विभिन्न समुदायों के बीच संसाधनों और अवसरों के समान वितरण को सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। इस कदम से राज्य की राजनीति और सामाजिक ढांचे में बड़े बदलाव की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कैबिनेट बैठक के बाद अपने सहयोगियों के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए आरक्षण के वर्गीकरण की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने अनुसूचित जातियों के लिए उपलब्ध कुल 15 प्रतिशत आरक्षण को तीन विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित करने का निर्णय लिया है:
Dalit Left-Hand Community (दलित वामपंथी समूह): इस समुदाय को सबसे बड़ा हिस्सा देते हुए 5.25 प्रतिशत आरक्षण आवंटित किया गया है।
Dalit Right-Hand Community (दलित दक्षिणपंथी समूह): इस समूह के लिए भी 5.25 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है।
अन्य अनुसूचित समूह (Other SC Groups): शेष 4.5 प्रतिशत आरक्षण उन समुदायों को दिया गया है जो उपरोक्त दोनों श्रेणियों में नहीं आते हैं।
आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि यह निर्णय कर्नाटक के दलित वर्ग और पूरे समाज के लिए एक स्पष्ट संदेश है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारी सरकार सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आरक्षण का लाभ केवल कुछ प्रभावशाली जातियों तक सीमित न रहे, बल्कि उन समुदायों तक भी पहुँचे जो दशकों से हाशिए पर हैं। सभी समुदायों के साथ न्याय करना ही हमारी प्राथमिकता है।” मुख्यमंत्री ने माना कि यह निर्णय चुनौतीपूर्ण था, लेकिन समावेशी विकास के लिए अनिवार्य था।
गौरतलब है कि कर्नाटक में अनुसूचित वर्ग के भीतर ‘लेफ्ट-हैंड’ और ‘राइट-हैंड’ समुदायों के बीच आरक्षण के लाभों को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। यह मुद्दा इतना संवेदनशील था कि पूर्व में भी कई बार कैबिनेट बैठकें बुलाई गईं, लेकिन किसी सर्वसम्मत निर्णय पर पहुँचना मुश्किल हो रहा था। मदिगा समुदाय (वामपंथी) अक्सर यह आरोप लगाता रहा है कि आरक्षण का बड़ा हिस्सा होलेया समुदाय (दक्षिणपंथी) ले जाता है। इस ऐतिहासिक फैसले के जरिए सरकार ने इन दोनों बड़े समूहों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है ताकि भविष्य में होने वाले टकरावों को कम किया जा सके।
सरकार ने आंतरिक आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए जातियों का स्पष्ट वर्गीकरण किया है:
Left-Hand Community: इसमें मुख्य रूप से मदिगा समुदाय और उसकी उपजातियां शामिल हैं। ये समूह ऐतिहासिक रूप से चमड़े के शिल्प और उससे जुड़े कार्यों से जुड़े रहे हैं।
Right-Hand Community: इसमें होलेया और चलावड़ी समुदायों का वर्चस्व है, जो पारंपरिक रूप से कृषि और उससे संबंधित कार्यों में लगे हुए हैं।
Touchable SCs (स्पर्शयोग्य दलित): इस श्रेणी में लंबानी, भोवी, कोरमा और कोरचा जैसे समूह आते हैं। ये जातियां सामाजिक पदानुक्रम में ‘लेफ्ट’ और ‘राइट’ समुदायों से अलग मानी जाती हैं और शिक्षा व नौकरियों में इनकी अपनी चुनौतियां रही हैं।
सरकार के इस कदम से अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी चुनावों में दलित वोट बैंक किस ओर झुकता है और विपक्षी दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
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