Karnataka
Karnataka Godman POCSO: कर्नाटक के यादगीर जिले से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ एक स्वयंभू बाबा, मल्लिकार्जुन मुत्या के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ, जिसमें कथित बाबा को एक सात साल की नाबालिग बच्ची के साथ अश्लील और आपत्तिजनक हरकतें करते हुए देखा गया। इस वीडियो के सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस और प्रशासन को तुरंत हरकत में आना पड़ा। यह घटना उस भरोसे पर कड़ा प्रहार करती है जो लोग धार्मिक स्थलों और स्वयंभू गुरुओं पर करते हैं।
यह शर्मनाक घटना 19 फरवरी को यादगीर जिले के शाहपुर तालुक के महल रोजा गांव में स्थित ‘यमनुरप्पा मुत्या मठ’ में घटित हुई। जानकारी के अनुसार, पीड़ित नाबालिग बच्ची मूल रूप से महाराष्ट्र के सोलापुर की रहने वाली है। वह अपने माता-पिता के साथ दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान के लिए इस मठ में आई थी। वायरल वीडियो में बाबा मल्लिकार्जुन मुत्या मठ के परिसर के भीतर ही बच्ची के साथ अनुचित व्यवहार करता दिखाई दे रहा है। जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक हुआ, कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (KSCPCR) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर स्वतः संज्ञान लिया।
KSCPCR ने यादगीर पुलिस को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। आयोग के आदेश के बाद, जिला बाल सुरक्षा अधिकारियों और विशेषज्ञों की एक टीम ने तुरंत उक्त आश्रम का दौरा किया। वहां उन्होंने बच्ची और उसके माता-पिता के बयान दर्ज किए। जांच के दौरान यह पाया गया कि वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य प्रथम दृष्टया अपराध की श्रेणी में आते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी धार्मिक या सामाजिक पद की आड़ में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस मामले में एक बेहद चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले माता-पिता ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि उन्होंने ही यह वीडियो बनाया था, लेकिन उन्हें बाबा की इन हरकतों में कुछ भी गलत या ‘अश्लील’ नहीं लगा। हालांकि, जब चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) ने बच्ची की काउंसलिंग की, तो विशेषज्ञों ने पाया कि वीडियो में बच्ची स्पष्ट रूप से असहज और डरी हुई दिख रही थी। कमेटी ने माता-पिता के दावों को दरकिनार करते हुए बच्ची के मानसिक और शारीरिक हितों को प्राथमिकता दी और तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज करने की सिफारिश की। विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार अंधश्रद्धा के कारण परिजन अपराध की गंभीरता को पहचान नहीं पाते।
यादगीर पुलिस ने अब विधिवत रूप से पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और जांच को आगे बढ़ाया है। पुलिस ने कथित बाबा मल्लिकार्जुन मुत्या को आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है और उसे जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे वीडियो की फॉरेंसिक जांच भी कराएंगे ताकि इसकी सत्यता और समय की पुष्टि हो सके। कानून के जानकारों का कहना है कि पोक्सो एक्ट के तहत इस तरह के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है। फिलहाल, बच्ची को सुरक्षित वातावरण में रखा गया है और उसे आवश्यक मानसिक सहायता प्रदान की जा रही है।
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