Karur stampede FIR: करूर भगदड़ मामला: एक्टर विजय की पार्टी TVK के जिला सचिव पर FIR, सरकार ने गठित किया जांच आयोग

Karur stampede FIR:  तमिलनाडु के करूर में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी ‘तमिलनाडु वेत्रि कझगम’ (TVK) की रैली में मची भीषण भगदड़ के मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। हादसे में 39 लोगों की मौत और करीब 100 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद अब TVK के करूर जिला सचिव वीपी मथियाझगन के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

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क्यों दर्ज हुआ केस?

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) एस. डेविडसन देवसिरवथम ने बताया कि TVK ने रैली के लिए 10,000 लोगों की अनुमति ली थी और परमिशन दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक के लिए थी, लेकिन भीड़ सुबह 11 बजे से ही जुटने लगी और अनुमान से तीन गुना ज्यादा करीब 27,000 लोग पहुंच गए। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि भीड़ को समय से पहले रैली स्थल पर आने क्यों दिया गया और आयोजकों ने इतने बड़े जनसमूह को नियंत्रित करने के लिए क्या तैयारी की थी।

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क्या कहा मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने?

हादसे के बाद मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने करूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल का दौरा कर घायलों का हालचाल जाना और राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रियों को निर्देश दिया कि पीड़ितों को हरसंभव मदद दी जाए। साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग के गठन की घोषणा की और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस घटना पर कोई राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं करेंगे और सच्चाई सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच की जाएगी। इसके अलावा करूर जिला प्रशासन ने भी मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मामले की रिपोर्ट तलब की है।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर इस भगदड़ को लेकर कई चिंताजनक सवाल उठ रहे हैं:

  • जब यह राजनीतिक रैली थी, तो बच्चों को क्यों लाया गया?

  • विजय को जब पता था कि भारी भीड़ उमड़ सकती है, तो वह समय पर क्यों नहीं पहुंचे?

  • TVK ने भीड़ नियंत्रण के लिए क्या उपाय किए थे?

  • जब भीषण गर्मी में लोग घंटों भूखे-प्यासे इंतजार कर रहे थे, तो आयोजकों और प्रशासन ने क्या इंतजाम किए?

यूजर्स मांग कर रहे हैं कि इतने बड़े हादसे की जिम्मेदारी तय की जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।

करूर भगदड़ की घटना केवल भीड़ नियंत्रण की चूक नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। अब जबकि FIR दर्ज हो चुकी है और जांच आयोग गठित हो चुका है, पीड़ितों को न्याय और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

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