Kathavachak Guard of Honor
Kathavachak Guard of Honor: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में पुलिस परेड ग्राउंड के भीतर एक कथावाचक के भव्य स्वागत और उन्हें दी गई सलामी ने प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी के लिए बिछाए गए रेड कारपेट और एसपी के नेतृत्व में पुलिस बल द्वारा दिए गए ‘सैल्यूट’ ने संवैधानिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने इसे सरकार और पुलिस महकमे पर हमले का हथियार बना लिया है।
मामले के तूल पकड़ते ही उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय हरकत में आ गया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए बहराइच के पुलिस अधीक्षक (SP) राम नयन सिंह को तलब किया है। यूपी पुलिस के आधिकारिक ‘X’ हैंडल से जानकारी दी गई कि परेड ग्राउंड जैसी संवेदनशील और अनुशासित जगह पर किसी गैर-संवैधानिक व्यक्ति को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देना नियमों के विरुद्ध है। डीजीपी ने एसपी से पूछा है कि किन परिस्थितियों में एक कथावाचक को वह सम्मान दिया गया जो आमतौर पर केवल संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों या राजकीय समारोहों के लिए आरक्षित होता है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना का वीडियो साझा करते हुए भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि जब पूरा पुलिस महकमा सलामी देने में व्यस्त रहेगा, तो प्रदेश के अपराधियों के हौसले बुलंद होना स्वाभाविक है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था चरमरा गई है और पुलिस अपने मूल कर्तव्य निभाने के बजाय ‘सलाम-सलाम’ का खेल खेल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शासन में इस अराजकता को देखने वाला कोई है या सभी इसी परेड का हिस्सा बन चुके हैं।
नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी इस मामले में अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा स्थापित लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रोटोकॉल का अपमान बताया। चंद्रशेखर का तर्क है कि पुलिस की वर्दी और सलामी का एक विशेष महत्व है, जिसे किसी धार्मिक प्रचारक के सामने झुकाना संस्थागत गरिमा को कम करना है। इस विरोध ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
चारों तरफ से घिरने के बाद बहराइच पुलिस ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा है। पुलिस का तर्क है कि पिछले कुछ समय में पुलिसकर्मियों के बीच मानसिक अवसाद (Depression) की समस्या बढ़ी है, जिसके कारण 25 से 28 जवानों ने इस्तीफा दे दिया है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, जवानों का मनोबल बढ़ाने और उनकी ‘इच्छाशक्ति’ (Will Power) को मजबूत करने के उद्देश्य से आचार्य पुंडरीक गोस्वामी को आमंत्रित किया गया था। पुलिस का कहना है कि यह केवल एक प्रेरणादायक सत्र था ताकि पुलिसकर्मी अपनी चुनौतियों का सामना बेहतर ढंग से कर सकें।
भले ही पुलिस ने इसे जवानों के कल्याण से जोड़ा हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देना एक विशुद्ध रूप से आधिकारिक प्रक्रिया है। किसी प्रेरणादायक भाषण के लिए किसी को बुलाना और उसे राजकीय सम्मान देना, दोनों अलग बातें हैं। अब देखना यह है कि डीजीपी के समक्ष एसपी क्या जवाब पेश करते हैं और इस मामले में क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। बहराइच की इस घटना ने एक बार फिर धर्म और प्रशासन के बीच की धुंधली होती रेखाओं पर बहस छेड़ दी है। सरकारी संस्थानों में निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा बनाए रखना लोकतंत्र की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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