S Jaishankar Speech: राजधानी में आयोजित कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2025 का रविवार को सफल समापन हुआ। इस अवसर पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारत की विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य और स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता सहित कई अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत आज न केवल अपनी राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से मिलकर अपने सुरक्षा तंत्र को और व्यापक बना रहा है।

मल्टी-अलाइनमेंट है भारत की रणनीति
जयशंकर ने साफ किया कि भारत की विदेश नीति का उद्देश्य उपयोगी और संतुलित संबंध बनाना है। उन्होंने कहा, “हम ऐसे रिश्ते चाहते हैं जो किसी एक देश के पक्ष में न झुके, ताकि अन्य संभावित साझेदारों के साथ अवसर न छूटें।” इस रणनीति को “मल्टी-अलाइनमेंट नीति” कहा गया, जिसके तहत भारत सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित और व्यावहारिक संबंध बनाए रख रहा है।

भारत-अमेरिका संबंध पहले से मजबूत
विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध पहले की तुलना में काफी मजबूत और परिपक्व हुए हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि व्यापार और ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में अब भी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ अनुचित हैं और इस पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। बातचीत फिलहाल किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची है।
रूस से तेल आयात पर दोहरे मापदंड की आलोचना
रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिका की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए जयशंकर ने कहा, “जब दूसरे देश भी रूस से तेल ले रहे हैं तो भारत पर सवाल क्यों? यह दोहरा मापदंड है जिसे हम स्वीकार नहीं करते।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेता है, और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत की ओर ठोस कदम
डॉ. जयशंकर ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत नींव रखी है। आने वाले पांच साल वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण होंगे, लेकिन भारत इन चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास और लचीलेपन के साथ करेगा। उन्होंने कहा कि भारत की बहुआयामी विदेश नीति देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाएगी।
भारत ने चुनौतियों को अवसर में बदला
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी भारत की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक संकटों को अवसरों में बदला। कोविड महामारी, वैश्विक मंदी, और ऊर्जा संकट जैसी स्थितियों में भारत ने न केवल समाधान दिए, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को मजबूती से स्थापित किया।
कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2025 में भारत की विदेश नीति, रणनीतिक संतुलन और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को मजबूती से प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि भारत अब न केवल वैश्विक चुनौतियों के लिए तैयार है, बल्कि उन्हें अवसर में बदलने की क्षमता भी रखता है।
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