Kawardha News
Kawardha News: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में पुलिस ने नशे के सौदागरों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। मंगलवार, 24 फरवरी की सुबह रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध कंटेनर को रोका। यह वाहन नागालैंड की पासिंग का था, जिसकी तलाशी लेने पर पुलिस के होश उड़ गए। इस विशालकाय कंटेनर के भीतर भारी मात्रा में मादक पदार्थ ‘गांजा’ भरा हुआ था। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह अवैध खेप ओडिशा से राजस्थान की ओर ले जाई जा रही थी।
यह पूरी कार्रवाई कवर्धा जिले के चिल्फी थाना क्षेत्र में अंजाम दी गई। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित इस संवेदनशील इलाके में पुलिस अक्सर संदिग्ध वाहनों पर पैनी नजर रखती है। पुलिस की टीम ने जब नागालैंड नंबर वाले इस कंटेनर को रुकवाकर उसकी बारीकी से जांच शुरू की, तो तस्करों की चालाकी सामने आई। तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए वाहन के ढांचे में विशेष बदलाव किए थे, लेकिन सुरक्षा बलों की सतर्कता के आगे उनकी एक न चली।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अमित पटेल ने घटना का आधिकारिक विवरण साझा करते हुए बताया कि तस्करों ने गांजे को छिपाने के लिए कंटेनर के भीतर एक ‘सीक्रेट चैंबर’ तैयार किया था। जब पुलिस ने इस गुप्त केबिन को तोड़ा, तो वहां से गांजे की कुल 30 बोरियां बरामद हुईं। प्रत्येक बोरी का वजन लगभग 30 किलो था। इस प्रकार कुल 9 क्विंटल (900 किलो) गांजा जब्त किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की अनुमानित कीमत करीब 5 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने न केवल नशीला पदार्थ बल्कि लगभग 50 लाख रुपये मूल्य के कंटेनर को भी अपने कब्जे में ले लिया है।
पुलिस ने इस मामले में कंटेनर के चालक को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान आयाज खान के रूप में हुई है, जो राजस्थान के भरतपुर जिले का निवासी है। पुलिस हिरासत में आरोपी से गहन पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आयाज महज एक मोहरा हो सकता है और इस पूरे रैकेट के पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट सक्रिय है। फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स और रूट मैप की जांच कर रही है ताकि तस्करी के इस जाल की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
कवर्धा पुलिस के अनुसार, इस मामले में अभी कई अहम तथ्यों की जांच होना बाकी है। पुलिस की प्राथमिकता यह पता लगाना है कि ओडिशा में यह गांजा किस व्यक्ति या गिरोह ने उपलब्ध कराया था और राजस्थान में इसकी डिलीवरी किसे दी जानी थी। ‘सोर्स’ और ‘डेस्टिनेशन’ का पता लगाने के लिए पुलिस की एक विशेष टीम गठित की जा सकती है जो अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करेगी। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और इस काले कारोबार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
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