Kaziranga Tiger Death
Kaziranga Tiger Death: असम के विश्व प्रसिद्ध काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व से एक दुखद खबर सामने आई है। रविवार को पार्क के पश्चिमी रेंज बागोरी के अंतर्गत आने वाले पश्चिम बिमोली इलाके में एक मादा बाघ (बाघिन) का शव बरामद किया गया। संरक्षित क्षेत्र के भीतर बाघिन का शव मिलने की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। घटना स्थल पर तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों की टीम पहुँची और इलाके को घेरे में लेकर साक्ष्य जुटाने शुरू किए। हालांकि, शुरुआती जांच ने इंसानी दखल या शिकार की आशंकाओं को काफी हद तक खारिज कर दिया है।
वन विभाग के विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, काजीरंगा जैसे घने जंगलों में बाघों के बीच अपने क्षेत्र (Territory) और रुतबे को लेकर वर्चस्व की लड़ाई होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। पार्क के निदेशक और डीएफओ अरुण विग्नेश ने मीडिया को जानकारी दी कि बाघिन के शरीर पर मिले निशानों से ऐसा प्रतीत होता है कि उसकी मौत किसी अन्य शक्तिशाली बाघ के साथ हुए हिंसक टकराव के कारण हुई है। जंगली जानवरों में अपने इलाके की रक्षा के लिए होने वाले इस संघर्ष को ‘इनफाइटिंग’ कहा जाता है, जो अक्सर जानलेवा साबित होता है।
बाघिन की मौत के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत एक विशेष मेडिकल टीम का गठन किया गया। इस टीम ने शव का विस्तृत पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट ने वन विभाग के दावों की पुष्टि की है कि बाघिन की मौत आपसी लड़ाई में आई गंभीर चोटों की वजह से हुई थी। पोस्टमार्टम के बाद बाघिन के अवशेषों का निपटान भी निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण या अवैध गतिविधि को रोका जा सके।
बाघिन की मौत की घटना के बीच ही काजीरंगा से जुड़ा एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 23 नवंबर 2025 को बिस्वनाथ वाइल्डलाइफ डिवीजन के सुरक्षाकर्मियों ने एक रॉयल बंगाल टाइगर की हड्डियों का जखीरा बरामद किया। ये हड्डियां अवैध रूप से छिपाकर रखी गई थीं और तस्कर इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने की फिराक में थे। वन विभाग की खुफिया टीम को मिली सटीक जानकारी के आधार पर इस तस्करी गिरोह को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया था।
काजीरंगा की फील्ड डायरेक्टर डॉ. सोनाली घोष ने बताया कि अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ चलाए गए इस अभियान में बड़ी सफलता मिली है। रॉयल बंगाल टाइगर की हड्डियां गोहपुर इलाके के निवासी देपेन पेगु के पास से बरामद की गईं। इस कार्रवाई में पूर्वी रेंज गमरिया और अपराध जांच रेंज पानीभड़ाल की टीमों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान एलाराम डोले, रिपुन पेगु, केरानी कामन, पुलिश कुटुम और देपेन पेगु के रूप में हुई है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पकड़े गए आरोपियों का संबंध उन पुराने अपराधियों से है जो काजीरंगा में गैंडों के शिकार की घटनाओं में शामिल रहे हैं। डॉ. सोनाली घोष के अनुसार, यह गिरोह वन्यजीवों के अवशेषों की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। वन विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह बाघ कब और कहाँ मारा गया था और इसके अवशेषों को खरीदने वाले मुख्य खरीदार कौन हैं। फिलहाल, सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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