KCC loan Interest Rate 2026
KCC loan Interest Rate 2026: बिहार सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और उन्हें कर्ज के बोझ से राहत दिलाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने किसानों को बेहद सस्ती दरों पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक नई योजना को मंजूरी दी है। इस दिशा में कृषि विभाग और नाबार्ड (NABARD) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता विशेष रूप से वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रभावी होगा, जिससे राज्य के लाखों किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
राजधानी पटना में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में कृषि मंत्री राम कृपाल यादव की उपस्थिति में इस एमओयू को अंतिम रूप दिया गया। इस अवसर पर सरकार और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। सरकार का मानना है कि यह पहल बिहार की कृषि व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगी। समझौते के तहत अब राज्य सरकार और नाबार्ड मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि बैंकिंग सुविधाओं का लाभ गांव के अंतिम किसान तक पहुंचे और उन्हें अपनी खेती के विस्तार के लिए पूंजी की कमी का सामना न करना पड़े।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि बिहार सरकार ने केंद्र सरकार की मौजूदा सब्सिडी के ऊपर अपना योगदान दिया है। वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा कृषि ऋण पर 3 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी दी जाती है। अब बिहार सरकार अपनी ‘राज्य योजना मद’ से 1 प्रतिशत की अतिरिक्त ब्याज सब्सिडी प्रदान करेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि किसानों को अब पहले के मुकाबले और भी कम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त होगा। यह छूट उन किसानों के लिए एक बड़ी राहत है जो निजी साहूकारों के ऊंचे ब्याज दरों के जाल में फंस जाते थे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ विशेष रूप से वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों से लिए गए ऋणों पर मिलेगा। योजना के दायरे में निम्नलिखित ऋण शामिल हैं:
3 लाख रुपये तक का फसल ऋण (Crop Loan)।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से लिया गया लोन।
अल्पकालिक कृषि उत्पादन ऋण।
हालांकि, इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने एक अनिवार्य शर्त भी रखी है। इस सब्सिडी का फायदा केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने ऋण का ईमानदारी से भुगतान करेंगे। सरकार का उद्देश्य ऋण चुकाने के प्रति अनुशासन पैदा करना और किसानों को डिफॉल्टर होने से बचाना है।
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में खेती में इस्तेमाल होने वाले इनपुट्स जैसे बीज, खाद और कीटनाशकों की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसानों को सस्ता और सुलभ संस्थागत कर्ज देना अनिवार्य है। सस्ता कर्ज मिलने से किसान आधुनिक कृषि यंत्रों और बेहतर सिंचाई सुविधाओं में निवेश कर सकेंगे। इससे न केवल प्रति एकड़ उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि किसानों की शुद्ध आय में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी का प्रवाह बढ़ेगा और साहूकारी प्रथा पर लगाम लगेगी। जब किसानों को बैंकों से सम्मानजनक और सस्ती दरों पर ऋण मिलेगा, तो वे अधिक उत्साह के साथ खेती कर सकेंगे। यह कदम बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में कृषि के योगदान को बढ़ाने में भी सहायक होगा। सरकार की इस पहल का किसान संगठनों ने भी स्वागत किया है।
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