Keir Starmer China Visit
Keir Starmer China Visit : अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में एक बड़ी हलचल देखने को मिली है। ब्रिटेन और चीन के बीच वर्षों से जमी बर्फ अब पिघलती नजर आ रही है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बीजिंग के प्रतिष्ठित ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। उल्लेखनीय है कि पिछले आठ वर्षों में किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों को पटरी पर लाने और आर्थिक सहयोग के नए द्वार खोलने की दिशा में एक ‘मील का पत्थर’ माना जा रहा है।
यह बैठक एक ऐसे नाजुक समय में हुई है जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और उनकी आक्रामक व्यापारिक नीतियों (टैरिफ) ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। हालांकि, बातचीत के दौरान ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन ‘वैश्विक अस्थिरता’ और ‘चुनौतीपूर्ण समय’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल बार-बार किया गया। प्रधानमंत्री स्टार्मर ने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे साझा वैश्विक मुद्दों पर ब्रिटेन और चीन का मिलकर काम करना समय की मांग है। वहीं, शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की वकालत करते हुए चेतावनी दी कि सहयोग के बिना दुनिया ‘जंगल राज’ की ओर लौट सकती है।
लगभग 80 मिनट तक चली इस बैठक के परिणाम काफी सुखद रहे हैं। दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को मजबूती देने के लिए कई बड़े समझौतों पर मुहर लगाई है। सबसे महत्वपूर्ण घोषणा वीजा को लेकर हुई, जिसके तहत अब ब्रिटिश पर्यटक और व्यवसायी 30 दिनों तक बिना वीजा के चीन की यात्रा कर सकेंगे। इसके साथ ही, चीन ने ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाले आयात शुल्क में कटौती करने का निर्णय लिया है, जो ब्रिटेन के निर्यातकों के लिए एक बड़ी वित्तीय राहत है। दवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एस्ट्राजेनेका ने भी 2030 तक चीन में 15 अरब डॉलर के विशाल निवेश का वादा किया है।
आर्थिक नजदीकियों के बावजूद, कूटनीतिक मोर्चे पर कुछ पुराने जख्म अब भी हरे हैं। कीर स्टार्मर ने हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों पर हो रही कार्रवाई और ब्रिटिश नागरिक जिमी लाई के मानवाधिकारों का मुद्दा पूरी प्रखरता से उठाया। चीन पर लगने वाले जासूसी के आरोपों और रूस-यूक्रेन युद्ध में बीजिंग के रुख ने पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच गहरी खाई पैदा की थी। स्टार्मर ने साफ किया कि ब्रिटेन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा, लेकिन वह सुरक्षा चिंताओं और आर्थिक हितों के बीच एक ‘संतुलन’ बनाकर चलना चाहता है।
प्रधानमंत्री स्टार्मर का मानना है कि ब्रिटेन अब अलग-थलग रहकर अपनी अर्थव्यवस्था को नहीं सुधार सकता। उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का सीधा असर ब्रिटिश नागरिकों की जेब और घरेलू कीमतों पर पड़ता है। ब्रिटेन से पहले दक्षिण कोरिया, कनाडा और फिनलैंड जैसे देश भी चीन के साथ अपने संबंधों को पुनर्परिभाषित करने के लिए बीजिंग का रुख कर चुके हैं। यह स्पष्ट है कि वैश्विक नेता अब अमेरिका की बदलती नीतियों के बीच चीन के साथ एक नया और स्थिर समीकरण तलाश रहे हैं ताकि आर्थिक विकास की गति बनी रहे।
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