Surajpur Elephant Death
Surajpur Elephant Death: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक दुखद खबर सामने आई है, जहाँ प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम करंजवार में शुक्रवार की सुबह एक नर हाथी का शव बरामद किया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने जब सुबह अपने गेहूं के खेतों की ओर रुख किया, तो वहां विशालकाय हाथी को मृत अवस्था में देखकर दंग रह गए। सूचना मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मृत हाथी की उम्र लगभग 15 वर्ष बताई जा रही है, जो पिछले कुछ दिनों से अकेले ही इस क्षेत्र में विचरण कर रहा था।
हाथी की मौत को लेकर वर्तमान में सबसे प्रबल आशंका विद्युत प्रवाहित तारों की चपेट में आना बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों और मौके पर पहुंचे वन विभाग के कर्मियों के अनुसार, हाथी की सूंड पर गहरे काले निशान पाए गए हैं। आमतौर पर ऐसे निशान तब बनते हैं जब कोई जीव हाई-वोल्टेज बिजली के संपर्क में आता है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी सावधानी बरत रहे हैं। घटनास्थल के आसपास बिजली के झूलते तारों या अवैध शिकार के लिए बिछाए गए फंदों की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
हाथी की मौत की सूचना मिलते ही सूरजपुर डीएफओ (DFO) डीपी साहू और एसडीओ (SDO) फॉरेस्ट संस्कृति बारले अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। वन विभाग ने तत्काल प्रभाव से पूरे क्षेत्र को अपने घेरे में ले लिया है ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। अधिकारियों ने ग्रामीणों से भी पूछताछ की है ताकि हाथी की अंतिम गतिविधियों का पता लगाया जा सके। विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या क्षेत्र में फसल सुरक्षा के नाम पर किसी किसान ने अवैध रूप से बिजली के तारों का घेरा बनाया था, जो अक्सर हाथियों के लिए काल बन जाता है।
एसडीओ संस्कृति बारले ने मीडिया से चर्चा करते हुए स्पष्ट किया कि हाथी की मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि केवल पोस्टमार्टम के बाद ही की जाएगी। पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम को शव परीक्षण के लिए बुलाया गया है। बारले ने बताया कि जिस स्थान पर शव मिला है, वहां खेतों की ऊंचाई बहुत अधिक नहीं है, जिससे यह समझना चुनौतीपूर्ण है कि क्या हाथी स्वाभाविक रूप से गिरा या किसी बाहरी झटके के कारण उसकी मृत्यु हुई। विसरा के नमूने भी लिए जा रहे हैं जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा, जिससे जहर या किसी बीमारी की संभावना को भी परखा जा सके।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रतापपुर और आसपास के क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। वर्तमान में पांच दंतैल हाथियों का एक समूह खड़गवां के पास सक्रिय है, जबकि एक अन्य दल राजपुर परिक्षेत्र की ओर बढ़ गया है। मृत हाथी अपने मूल दल से अलग होकर अकेला घूम रहा था, जिसकी सूचना वन विभाग ने पहले ही मुनादी के जरिए आसपास के गांवों को दे दी थी। इस घटना ने एक बार फिर मानव-हाथी द्वंद्व और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय खेतों की ओर न जाएं और बिजली के तारों का प्रयोग न करें।
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