Kerala Election 2026
Kerala Election 2026 : केरल में सत्ता वापसी के लिए कांग्रेस (Congress) ने अभी से अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार वामपंथी गठबंधन (LDF) की जीत ने कांग्रेस के पारंपरिक ‘हर पांच साल में सरकार बदलने’ के रिकॉर्ड को तोड़ दिया था। इस हार से सबक लेते हुए पार्टी आलाकमान ने 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए एक विशेष ‘मास्टरप्लान’ तैयार किया है। इस बार टिकट वितरण से लेकर मुख्यमंत्री के चयन तक, पार्टी ने ऐसे कड़े नियम बनाए हैं जिनसे गुटबाजी पर लगाम कसी जा सके और केवल जीतने वाले चेहरों को ही मैदान में उतारा जाए।
कांग्रेस नेतृत्व ने इस बार उम्मीदवारों के चयन के लिए कड़े मापदंड तय किए हैं। पार्टी के नए नियमों के मुताबिक, जो उम्मीदवार पिछले विधानसभा चुनाव में 5,000 से अधिक वोटों के अंतर से हारे थे, उन्हें इस बार टिकट की दौड़ से बाहर कर दिया गया है। इसके अलावा, जो नेता पिछले दो चुनावों से लगातार हार का सामना कर रहे हैं, उन्हें भी इस बार मौका नहीं दिया जाएगा। पार्टी का मानना है कि इन कड़े कदमों से युवाओं और नए चेहरों के लिए रास्ता खुलेगा और जनता के बीच पार्टी की छवि ‘पराजित नेताओं के संगठन’ के रूप में नहीं बनेगी।
केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) को दिए गए निर्देशों में एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि किसी भी वर्तमान सांसद (MP) को विधानसभा चुनाव नहीं लड़वाया जाएगा। पार्टी चाहती है कि सांसद अपने मौजूदा कार्यक्षेत्र पर ध्यान दें। हालांकि, मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस ने एक लचीला रुख अपनाया है। चुनाव जीतने के बाद विधायकों की राय से ही मुख्यमंत्री तय किया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री बनने वाला व्यक्ति कोई विधायक भी हो सकता है और जरूरत पड़ने पर किसी सांसद को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है, बशर्ते विधायक दल की उस पर सहमति हो।
अक्सर देखा जाता है कि एक ही सीट पर कई मजबूत दावेदारों के होने से टिकट न मिलने पर बागी सुर उठने लगते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए कांग्रेस ने एक अनोखा प्रस्ताव रखा है। मास्टरप्लान के तहत, यदि किसी सीट पर एक से अधिक कद्दावर उम्मीदवार हैं, तो जिसे टिकट नहीं मिलेगा, उसे सरकार बनने पर बोर्ड या निगमों में प्रतिष्ठित स्थान दिया जाएगा। लेकिन एक शर्त यह भी है कि जिसे टिकट मिला और वह चुनाव हार गया, उसे सरकार में कहीं भी समायोजित (Adjust) नहीं किया जाएगा। यह नियम उम्मीदवारों को पूरी ताकत से चुनाव लड़ने के लिए मजबूर करेगा।
केरल की राजनीति में सरगर्मी उस वक्त और बढ़ गई जब सत्ताधारी माकपा (CPI-M) से जुड़े बड़े चेहरे कांग्रेस के कार्यक्रमों में नजर आए। मशहूर अभिनेता प्रेम कुमार, जिन्हें हाल ही में केरल चलचित्र अकादमी के अध्यक्ष पद से हटाया गया था, कोट्टायम में कांग्रेस के ‘संस्कार उत्सव 2026’ के मंच पर देखे गए। हालांकि उन्होंने इसे सांस्कृतिक जुड़ाव बताया, लेकिन सरकार पर उनके हमले कुछ और ही संकेत दे रहे हैं। इसी तरह, पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन के पूर्व निजी सहायक सुरेश भी कांग्रेस की ‘पुथुयुग यात्रा’ में शामिल हुए, जिससे माकपा खेमे में चिंता बढ़ गई है।
केरल में यूडीएफ (UDF) के नेतृत्व वाली कांग्रेस के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई जैसा है। पिछले चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी को निर्देश दिए गए हैं कि वे जमीनी रिपोर्ट के आधार पर ही नाम फाइनल करें। पार्टी का मुख्य फोकस उन सीटों पर है जहाँ हार का अंतर बहुत कम था। कांग्रेस अब केवल पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे नहीं, बल्कि माइक्रो-मैनेजमेंट और कड़े अनुशासन के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
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