Kerala Election 2026
Kerala Election 2026: दक्षिण भारतीय राज्य केरल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। एक तरफ वामपंथी दलों के नेतृत्व वाला एलडीएफ (LDF) गठबंधन है, जो लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) है, जो सत्ता परिवर्तन के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। हालांकि, केरल की यह स्थानीय चुनावी जंग अब दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति और विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रही है। राहुल गांधी द्वारा केरल में वामपंथी पार्टियों पर किए गए तीखे हमलों ने गठबंधन के भीतर दरार पैदा कर दी है, जिससे विपक्षी एकता खतरे में नजर आ रही है।
सोमवार (9 मार्च) को दिल्ली में विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक का प्राथमिक एजेंडा आगामी संसद सत्र की रणनीति तैयार करना था, लेकिन चर्चा का रुख अचानक केरल की राजनीति की ओर मुड़ गया। वामपंथी सांसद जॉन ब्रिट्स और पी. संतोष कुमार ने बैठक में राहुल गांधी के हालिया बयानों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। लेफ्ट नेताओं का तर्क है कि राहुल गांधी जिस तरह से केरल में वामपंथी पार्टियों को निशाना बना रहे हैं, उससे गठबंधन की एकता प्रभावित होगी और भविष्य के संबंधों में कड़वाहट आएगी।
विवाद की मुख्य जड़ राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किया गया एक विशेष शब्द है। राहुल गांधी ने केरल में एक जनसभा के दौरान आरोप लगाया था कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कम्युनिस्ट दलों के बीच आंतरिक साठगांठ है। उन्होंने तंज कसते हुए ‘कम्युनिस्ट जनता पार्टी’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिससे वामपंथी नेता बुरी तरह भड़क गए हैं। लेफ्ट सांसदों ने बैठक में सवाल उठाया कि जब हम राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ हैं, तो राहुल गांधी बीजेपी और हमारे बीच गठजोड़ की बात कैसे कर सकते हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की बयानबाजी के बीच गठबंधन को सुचारू रूप से चलाना असंभव होगा।
बैठक के दौरान जब माहौल तनावपूर्ण हुआ, तो कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मोर्चा संभाला। उन्होंने लेफ्ट सांसदों के रुख पर आपत्ति जताते हुए कहा कि संसद सत्र की रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई बैठक में राहुल गांधी के भाषण के एक छोटे से हिस्से को मुद्दा बनाना अनुचित है। वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी के बयान का एक विशेष संदर्भ था, जिसे बाद में विस्तार से स्पष्ट किया जाएगा। इस दौरान खुद राहुल गांधी भी वहां मौजूद थे और उन्होंने भी संक्षिप्त रूप में कहा कि इस विषय पर अलग से चर्चा की जा सकती है, फिलहाल हमें संसद के एजेंडे पर ध्यान देना चाहिए।
केरल में अगले कुछ ही महीनों में चुनाव होने हैं और यहां की राजनीतिक स्थिति अन्य राज्यों से काफी भिन्न है। पिछले दो कार्यकालों से पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार सत्ता पर काबिज है। कांग्रेस को उम्मीद है कि एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) के चलते इस बार वह सत्ता हासिल कर लेगी। केरल में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और लेफ्ट के बीच ही रहता है, जबकि बीजेपी यहां तीसरे नंबर की ताकत बनकर उभरने की कोशिश कर रही है। यही कारण है कि राहुल गांधी को केरल की जमीन पर अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी (लेफ्ट) पर हमला करना पड़ रहा है, जो दिल्ली में उनकी सबसे बड़ी सहयोगी है।
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