Kerala CM Post
Kerala CM Post : केरलम विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के साथ ही कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) गठबंधन की ऐतिहासिक जीत तो साफ हो गई, लेकिन असली संघर्ष नतीजों के बाद शुरू हुआ। 4 मई को जैसे ही रुझानों ने स्पष्ट बहुमत की ओर इशारा किया, तिरुवनंतपुरम स्थित कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ जश्न के सागर में डूब गया। कार्यकर्ताओं के हाथों में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल जैसे दिग्गजों के पोस्टर थे। हालांकि, जीत की इस खुशी के बीच ‘भावी मुख्यमंत्री’ के नाम को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। नतीजों के एक हफ्ते बाद भी कांग्रेस आलाकमान केरलम के लिए एक “लीडर” तय नहीं कर पाया है, जिससे पार्टी की किरकिरी हो रही है।
पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री पद का सबसे स्वाभाविक दावेदार माना जा रहा है। राहुल गांधी के अत्यंत विश्वासपात्र वेणुगोपाल का सियासी कद दिल्ली से लेकर केरलम तक काफी बड़ा है। जब कांग्रेस द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने नवनिर्वाचित विधायकों की राय जाननी चाही, तो 63 में से अधिकांश विधायकों ने वेणुगोपाल के पक्ष में अपना मत दिया। सांसदों और वरिष्ठ नेताओं का एक बड़ा वर्ग भी राज्य की कमान उनके हाथों में सौंपने का इच्छुक है। हालांकि, वेणुगोपाल ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है, ऐसे में उन्हें सीएम बनने की स्थिति में अपनी लोकसभा सीट छोड़नी होगी और विधानसभा का उपचुनाव लड़ना होगा।
वेणुगोपाल के विजय रथ के सामने सबसे बड़ी चुनौती वीडी सतीशन बनकर उभरे हैं। निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष के रूप में सतीशन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ी है। कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी पार्टी आईयूएमएल (IUML) भी सतीशन के नाम पर अड़ी हुई है। सतीशन समर्थकों का तर्क है कि जमीन पर मेहनत करने वाले नेता को ही फल मिलना चाहिए। सतीशन के खेमे ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया, तो वे किसी अन्य की कैबिनेट का हिस्सा नहीं बनेंगे। यह ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ कांग्रेस आलाकमान के लिए सिरदर्द साबित हो रही है।
इस त्रिकोणीय मुकाबले में पूर्व गृहमंत्री रमेश चेन्नीथला भी अपनी वरिष्ठता के आधार पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वेणुगोपाल का पलड़ा भारी होते देख सतीशन समर्थकों ने केरलम की सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया और पोस्टर फाड़े। इस गुटबाजी ने राहुल गांधी को नाराज कर दिया है। उन्होंने दिल्ली में तीनों दावेदारों के साथ लंबी बैठक की और उन्हें अपने समर्थकों को काबू में रखने की सख्त हिदायत दी। आलाकमान की दुविधा यह है कि वे विधायकों की राय (वेणुगोपाल) को तवज्जो दें या सहयोगियों और जनता की पसंद (सतीशन) को।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व एक ‘बीच का रास्ता’ निकालने की कोशिश में है। चर्चा है कि वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाकर सतीशन को सरकार में सबसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपा जाए, जबकि वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नीथला को विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाए। हालांकि, सतीशन की नाराजगी और उपचुनावों की बाध्यता इस फॉर्मूले में रोड़ा अटका रही है। फिलहाल राहुल गांधी और खरगे की अन्य व्यस्तताओं के कारण निर्णय टल गया है। मंगलवार को राहुल गांधी ने केरलम के पूर्व प्रदेश अध्यक्षों की बैठक बुलाई है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि इस पेंच को सुलझाने में अभी और समय लग सकता है। अन्य चार राज्यों में मुख्यमंत्री तय होने के बाद अब सबकी निगाहें केवल केरलम पर टिकी हैं।
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