VB-G RAM G Scheme : भारत सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव की घोषणा की है। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में केंद्र सरकार ने बताया कि ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) को समाप्त कर दिया जाएगा। इसकी जगह अब एक नई और अधिक व्यापक योजना ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G लागू की जाएगी। यह नई व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी होगी। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को आधुनिक बनाना और ग्रामीणों की आजीविका को अधिक सुरक्षित करना है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कानून में इस बदलाव से जमीन पर चल रहे कार्यों या मजदूरों के रोजगार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। अधिसूचना के अनुसार, 30 जून तक मनरेगा के तहत जो भी परियोजनाएं या काम चल रहे होंगे, उन्हें नए सिस्टम के तहत बिना किसी रुकावट के जारी रखा जाएगा। ट्रांजिशन की प्रक्रिया को इतना सरल बनाया गया है कि किसी भी प्रोजेक्ट को बीच में रोकने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार ने मजदूरों को भरोसा दिलाया है कि इस बदलाव के दौरान किसी को भी रोजगार से वंचित नहीं किया जाएगा।
मजदूरों की सुविधा के लिए सरकार ने जॉब कार्ड संबंधी नियमों को भी लचीला रखा है। जिन मजदूरों के मनरेगा जॉब कार्ड पहले से e-KYC द्वारा वेरिफाइड हैं, वे तब तक पूरी तरह मान्य रहेंगे जब तक नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी नहीं कर दिए जाते। जिन श्रमिकों का e-KYC अभी अधूरा है, उन्हें भी काम देने से मना नहीं किया जाएगा। साथ ही, नए मजदूरों का पंजीकरण ग्राम पंचायत स्तर पर पुरानी प्रक्रिया के अनुसार ही चलता रहेगा। सरकार वर्तमान में मजदूरी भुगतान और शिकायत निवारण से जुड़े नए नियमों का ड्राफ्ट तैयार कर रही है, जिसे जल्द ही राज्यों के साथ चर्चा के बाद सार्वजनिक किया जाएगा।
नए कानून की सबसे बड़ी विशेषता रोजगार की गारंटी अवधि में की गई वृद्धि है। पहले मनरेगा के तहत एक ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन के काम की गारंटी मिलती थी, लेकिन VB-G RAM G के तहत अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। साल में अतिरिक्त 25 दिनों का रोजगार मिलने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और गांवों से पलायन रोकने में मदद मिलेगी। मंत्रालय ने ग्राम पंचायतों को इस पूरी व्यवस्था का ‘केंद्रीय स्तंभ’ बताया है, जिससे गांवों में बुनियादी ढांचे में सुधार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
नए कानून की धारा 22 के तहत योजना के वित्तीय भार को केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करेंगी। सामान्य राज्यों के लिए खर्च का अनुपात 60:40 (60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य) तय किया गया है। हालांकि, पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड जैसे केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाएगी। इसके अलावा, धारा 6 के तहत राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे खेती के व्यस्त समय (बुवाई और कटाई) के दौरान साल में अधिकतम 60 दिनों तक इस योजना के तहत मिलने वाले कार्यों को नियंत्रित या स्थगित कर सकें, ताकि कृषि कार्यों के लिए श्रमिकों की उपलब्धता बनी रहे।
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