Illegal Opium Farming: क्या खजुरी का तुर्रीपानी गांव बन रहा था नशे का नया गढ़? 1.47 एकड़ में फैली अफीम की फसल और 18 क्विंटल का भारी जखीरा देखकर पुलिस के भी होश उड़ गए। आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा था यह काला कारोबार और कौन हैं वे सफेदपोश चेहरे जो इसके पीछे छिपे हैं?बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से नशीले पदार्थों के खिलाफ एक बड़ी सफलता की खबर सामने आई है। जिला प्रशासन और पुलिस की सतर्कता ने झारखंड सीमा से सटे एक सुदूर इलाके में चल रहे काले कारोबार का पर्दाफाश किया है।
यह पूरी कार्रवाई बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कोरंधा थाना अंतर्गत ग्राम खजुरी (तुर्रीपानी) में अंजाम दी गई। 12 मार्च को पुलिस को विश्वसनीय मुखबिरों से गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि वनांचल क्षेत्रों में छिपकर अफीम की खेती की जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (SDOP) कुसमी के नेतृत्व में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। इस ऑपरेशन में केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि राजस्व विभाग, वन विभाग और एफएसएल (SFL) की टीम को भी शामिल किया गया ताकि साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं में कोई कमी न रहे।
जब संयुक्त टीम ने चिन्हित स्थल तुर्रीपानी पर धावा बोला, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। लगभग 1.47 एकड़ के विस्तृत भू-भाग पर अवैध रूप से अफीम (Poppy) उगाई गई थी। घने जंगलों के बीच स्थित इन खेतों को इस तरह चुना गया था कि आम लोगों की नजर वहां न पड़े। पुलिस ने मौके पर पाया कि अफीम के पौधे पूरी तरह तैयार हो चुके थे। टीम ने तुरंत घेराबंदी की और खेत में मौजूद फसल को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की।
छापेमारी के दौरान खेत की निगरानी कर रहे दो संदिग्धों ने पुलिस बल को देखते ही जंगल की ओर भागने का प्रयास किया। हालांकि, पहले से सतर्क जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों को खदेड़कर पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सहादुर नगेशिया (34 वर्ष) और दुईला नगेशिया (40 वर्ष) के रूप में हुई है, जो इसी ग्राम खजुरी के निवासी हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अवैध रूप से अफीम की खेती कर रहे थे।
पुलिस ने वैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए खेत से अफीम के पौधों को जड़, तना, पत्ती, फूल और फल समेत उखाड़कर जब्त किया। जब इन पौधों का वजन कराया गया, तो कुल मात्रा 1883.76 किलोग्राम (लगभग 18 क्विंटल 83 किलो) निकली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस जब्तशुदा माल की अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 8 और 18 के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
कलेक्टर राजेन्द्र कटारा ने इस मामले पर स्पष्ट किया कि यह अवैध खेती छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा से लगे दुर्गम इलाकों में की जा रही थी। उन्होंने अंदेशा जताया है कि इसमें स्थानीय आरोपियों के अलावा बाहरी राज्यों के ड्रग माफियाओं का भी हाथ हो सकता है। पुलिस अधीक्षक वैभव बेंकर ने बताया कि इस मामले की ‘एंड-टू-एंड’ जांच की जा रही है। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन को खंगाल रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचा जा सके।
जिला प्रशासन ने इस बड़ी कार्रवाई के बाद स्पष्ट संदेश दिया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन जांच अभियान निरंतर जारी रहेगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने आसपास होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अवैध खेती की जानकारी पुलिस को दें। पुलिस, राजस्व और वन विभाग की टीमें अब ड्रोन और स्थानीय इंटेलिजेंस की मदद से अन्य संभावित ठिकानों पर भी नजर रख रही हैं।
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