Pak-Afghan War
Pak-Afghan War: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमाई तनाव अब एक गंभीर सैन्य संघर्ष का रूप ले चुका है। हालिया घटनाक्रम में, तालिबान के आधिकारिक प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुजाहिद के अनुसार, पाकिस्तान वायुसेना (PAF) ने कंधार हवाई अड्डे के समीप स्थित निजी एयरलाइन ‘काम एयर’ (Kam Air) के ईंधन डिपो को निशाना बनाया है। यह डिपो न केवल घरेलू उड़ानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के विमानों को भी ईंधन की आपूर्ति करता है। तालिबान का दावा है कि पाकिस्तान जानबूझकर अफगानिस्तान के आर्थिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचा रहा है, जैसा कि उसने पहले भी राष्ट्रीय व्यापारी हाजी खान जदाह के भंडार पर हमला करके किया था।
विवादित डूरंड लाइन के आसपास के क्षेत्रों में स्थिति अत्यंत विस्फोटक हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने खोस्त प्रांत के अलीशेर-तेरेजाई इलाके में भारी तोपखाने से गोले दागे हैं। इस गोलाबारी की चपेट में आने से एक ही परिवार के चार निर्दोष सदस्यों की जान चली गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। फरवरी माह से ही डूरंड लाइन के दोनों ओर हमलों की तीव्रता बढ़ी है। 27 फरवरी को पाकिस्तान द्वारा काबुल सहित अफगानिस्तान के कई प्रमुख शहरों पर की गई एयरस्ट्राइक ने इस आग में घी डालने का काम किया है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद पूरी तरह ठप पड़ गया है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मौजूदा स्थिति को ‘खुली जंग’ करार देते हुए अफगानिस्तान पर कड़े प्रहार किए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि काबुल में बैठी तालिबान सरकार वैश्विक आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करा रही है और सीमा पार उग्रवाद को बढ़ावा दे रही है। दूसरी ओर, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। अफगान पक्ष का दावा है कि 26 फरवरी को डूरंड लाइन पर की गई जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 55 सैनिकों को मार गिराया गया था। यह विरोधाभासी दावे युद्ध की भयावहता को दर्शाते हैं।
2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद से ही इस्लामाबाद और काबुल के रिश्तों में खटास आई है। पाकिस्तान का मुख्य आरोप ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) को लेकर है। पाकिस्तान का मानना है कि TTP के लड़ाके अफगान सरजमीं का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। हालांकि अफगान तालिबान और TTP सांगठनिक रूप से अलग हैं, लेकिन उनके बीच गहरे वैचारिक और सामाजिक संबंध जगजाहिर हैं। 2007 में गठित हुआ TTP अब पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा बन चुका है, जिसने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे प्रांतों में हिंसा का नंगा नाच शुरू कर दिया है।
वर्तमान में पाकिस्तान न केवल TTP बल्कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की सक्रियता से भी जूझ रहा है। अफगानिस्तान से सटी सीमा पर बढ़ती हिंसक घटनाओं ने पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डूरंड लाइन को लेकर दशकों पुराना विवाद अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहाँ दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। इस संघर्ष के कारण सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों नागरिक पलायन करने को मजबूर हैं, और यदि अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह क्षेत्रीय अस्थिरता एक बड़े मानवीय संकट में बदल सकती है।
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