Kiren Rijiju On Rahul Gandhi
Kiren Rijiju On Rahul Gandhi: संसदीय लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वैचारिक मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन हाल ही में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर जिस भाषा में हमला किया है, उसने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। रिजिजू ने एक साक्षात्कार के दौरान राहुल गांधी को देश की सुरक्षा के लिए एक ‘बड़ा खतरा’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के संबंध भारत विरोधी ताकतों और माओवादी विचारधारा वाले समूहों से हैं। रिजिजू के अनुसार, संसद में हंगामा और राजनीतिक एजेंडा अपनी जगह है, लेकिन जब बात राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता की आती है, तो वहां कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
किरेन रिजिजू ने संसदीय गरिमा का हवाला देते हुए राहुल गांधी के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता पूरे विपक्ष का प्रतिनिधित्व करता है और उसकी जिम्मेदारी काफी बड़ी होती है। रिजिजू ने तुलना करते हुए कहा, “जब हम (बीजेपी) विपक्ष में थे, तब हमने कभी स्पीकर पर कागज नहीं फेंके या संसद की मर्यादा को इस तरह तार-तार नहीं किया।” उन्होंने राहुल गांधी के विदेश दौरों और वहां दिए गए बयानों पर तंज कसते हुए कहा कि लोगों को देशद्रोही कहना और अपुष्ट तथ्यों के आधार पर सरकार को घेरना एक ‘बचकाना बर्ताव’ है, जो एक जिम्मेदार नेता को शोभा नहीं देता।
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाए गए हालिया आरोपों का भी पुरजोर खंडन किया। रिजिजू ने ‘एपस्टीन फाइलों’ का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी अक्सर झूठ का सहारा लेकर जनता को गुमराह करते हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री का नाम किसी विवादास्पद दस्तावेज में है या वे किसी संदिग्ध व्यक्ति से मिले हैं, तो राहुल को उसके सबूत पेश करने चाहिए। रिजिजू ने इसे ‘निराशाजनक राजनीति’ बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का नाम जबरदस्ती अंतरराष्ट्रीय विवादों से जोड़ना देश की छवि को वैश्विक मंच पर खराब करने की एक सोची-समझी साजिश है।
रिजिजू का सबसे बड़ा हमला राहुल गांधी के बाहरी संपर्कों को लेकर था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के तार उन लोगों और ताकतों से जुड़े हैं जो भारत की प्रगति को रोकना चाहते हैं। रिजिजू ने कहा, “राहुल गांधी जॉर्ज सोरोस जैसे विवादित व्यक्तियों से मिलते हैं और उनके पास भारत विरोधी तत्वों व चरमपंथियों का समर्थन है।” उन्होंने यह भी दावा किया कि माओवादी विचारधारा के प्रति राहुल का नरम रुख देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भविष्य में बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है।
इस राजनीतिक बहस के केंद्र में पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की ‘अनपब्लिश्ड’ आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ भी है। राहुल गांधी ने गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की निर्णय क्षमता पर सवाल उठाने के लिए इस किताब के कुछ अंशों का सहारा लिया था। इन अंशों में उल्लेख किया गया था कि 2020 में चीनी सेना पूर्वी लद्दाख में टैंकों के साथ आगे बढ़ रही थी। राहुल ने इसे आधार बनाकर सरकार पर निशाना साधा कि सेना प्रमुख की जानकारी के बावजूद प्रधानमंत्री उचित फैसला नहीं ले पाए। हालांकि, सदन में स्पीकर ने उन्हें इन तथ्यों को कोट करने से रोक दिया था, जो आज भी एक बड़ा विवादित मुद्दा बना हुआ है।
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