Durga Puja 2025 : कोलकाता उच्च न्यायालय ने दुर्गा पूजा अनुदान पर कड़ा रुख अपनाया, बिना हिसाब के नहीं मिलेगा अनुदान

Durga Puja 2025 : कोलकाता उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने दुर्गा पूजा अनुदान को लेकर एक अहम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि दुर्गा पूजा कमेटियों को राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान का सटीक हिसाब देना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें अनुदान नहीं मिलेगा। यह आदेश पिछले कुछ वर्षों से दुर्गा पूजा समितियों को अनुदान देने की प्रथा पर नियंत्रण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। अनुदान पर न्यायालय का आदेश कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति स्मिता दास डे की खंडपीठ ने बुधवार को आदेश दिया कि जिन क्लबों ने पिछले साल के अनुदान का कोई हिसाब नहीं दिया है, उन्हें इस वर्ष अनुदान नहीं मिलेगा। अदालत ने कहा है कि बिना उपयोग प्रमाण पत्र या खर्च का विवरण प्रस्तुत किए बिना किसी भी क्लब को सरकारी अनुदान जारी नहीं किया जाएगा। अनुदान की राशि और राहत राज्य सरकार ने पिछले साल प्रत्येक दुर्गा पूजा कमेटी को 85,000 रुपये का अनुदान दिया था, जो इस साल बढ़कर 1,10,000 रुपये हो गया है। इसके अतिरिक्त, बिजली के बिल माफ करने की भी सुविधा प्रदान की गई है। इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि अनुदान तो मिलेगा, लेकिन क्लबों को पारदर्शिता के साथ इसके खर्च का विवरण देना होगा। अनुदान की जांच और रिपोर्टिंग अदालत ने कहा कि अनुदान का गलत उपयोग राज्य के हित में नहीं है और इसका सख्ती से निरीक्षण किया जाएगा। न्यायालय ने सभी क्लबों को एक महीने का समय दिया है ताकि वे पिछले वर्ष के खर्च का सही हिसाब प्रस्तुत कर सकें। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुदान का दुरुपयोग रोका जाएगा। सरकार का आंकड़ा और जवाब राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 2024 में जिले और शहर में कुल 2,876 दुर्गा पूजा समितियों को अनुदान दिया गया था। इनमें से अधिकांश ने उपयोग प्रमाण पत्र दिया है। हालांकि, नए क्लब जोड़े गए हैं, उन्हें इस गणना में शामिल नहीं किया जाएगा और केवल उन्हीं क्लबों से हिसाब मांगा जाएगा जिन्हें पिछले वर्ष अनुदान मिला था। ममता सरकार के अनुदान पर विवाद इस आदेश के बाद भाजपा पार्षद और शहर के पूजा समितियों के संस्थापक सजल घोष ने कहा, “सरकार को धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण अपनाते हुए खेल, मेले या पूजा पर सरकारी धन खर्च नहीं करना चाहिए। करदाता के पैसे का उपयोग विकास और सुरक्षा पर होना चाहिए।” खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अनुदान का सही उपयोग और उसकी पारदर्शिता आवश्यक है। बिना हिसाब-किताब के कोई भी क्लब अनुदान प्राप्त नहीं कर सकेगा। अदालत ने 48 घंटे के भीतर हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था और उसी के आधार पर बुधवार को अपना फैसला सुना दिया। Read More  : Gujarat Political Funding: गुजरात में गुमनाम राजनीतिक दलों को ₹4300 करोड़ का चंदा,  राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल

Durga Puja 2025 : कोलकाता उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने दुर्गा पूजा अनुदान को लेकर एक अहम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि दुर्गा पूजा कमेटियों को राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान का सटीक हिसाब देना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें अनुदान नहीं मिलेगा। यह आदेश पिछले कुछ वर्षों से दुर्गा पूजा समितियों को अनुदान देने की प्रथा पर नियंत्रण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी किया गया है।

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अनुदान पर न्यायालय का आदेश

कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति स्मिता दास डे की खंडपीठ ने बुधवार को आदेश दिया कि जिन क्लबों ने पिछले साल के अनुदान का कोई हिसाब नहीं दिया है, उन्हें इस वर्ष अनुदान नहीं मिलेगा। अदालत ने कहा है कि बिना उपयोग प्रमाण पत्र या खर्च का विवरण प्रस्तुत किए बिना किसी भी क्लब को सरकारी अनुदान जारी नहीं किया जाएगा।

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अनुदान की राशि और राहत

राज्य सरकार ने पिछले साल प्रत्येक दुर्गा पूजा कमेटी को 85,000 रुपये का अनुदान दिया था, जो इस साल बढ़कर 1,10,000 रुपये हो गया है। इसके अतिरिक्त, बिजली के बिल माफ करने की भी सुविधा प्रदान की गई है। इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि अनुदान तो मिलेगा, लेकिन क्लबों को पारदर्शिता के साथ इसके खर्च का विवरण देना होगा।

अनुदान की जांच और रिपोर्टिंग

अदालत ने कहा कि अनुदान का गलत उपयोग राज्य के हित में नहीं है और इसका सख्ती से निरीक्षण किया जाएगा। न्यायालय ने सभी क्लबों को एक महीने का समय दिया है ताकि वे पिछले वर्ष के खर्च का सही हिसाब प्रस्तुत कर सकें। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुदान का दुरुपयोग रोका जाएगा।

सरकार का आंकड़ा और जवाब

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 2024 में जिले और शहर में कुल 2,876 दुर्गा पूजा समितियों को अनुदान दिया गया था। इनमें से अधिकांश ने उपयोग प्रमाण पत्र दिया है। हालांकि, नए क्लब जोड़े गए हैं, उन्हें इस गणना में शामिल नहीं किया जाएगा और केवल उन्हीं क्लबों से हिसाब मांगा जाएगा जिन्हें पिछले वर्ष अनुदान मिला था।

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ममता सरकार के अनुदान पर विवाद

इस आदेश के बाद भाजपा पार्षद और शहर के पूजा समितियों के संस्थापक सजल घोष ने कहा, “सरकार को धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण अपनाते हुए खेल, मेले या पूजा पर सरकारी धन खर्च नहीं करना चाहिए। करदाता के पैसे का उपयोग विकास और सुरक्षा पर होना चाहिए।” खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अनुदान का सही उपयोग और उसकी पारदर्शिता आवश्यक है। बिना हिसाब-किताब के कोई भी क्लब अनुदान प्राप्त नहीं कर सकेगा। अदालत ने 48 घंटे के भीतर हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था और उसी के आधार पर बुधवार को अपना फैसला सुना दिया।

Read More  : Gujarat Political Funding: गुजरात में गुमनाम राजनीतिक दलों को ₹4300 करोड़ का चंदा,  राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल

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