Electricity Crisis : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां लेमरू क्षेत्र के लगभग 20 गांव पिछले एक सप्ताह से पूर्णतः अंधेरे में डूबे हुए हैं। हाल ही में आए खराब मौसम और तेज आंधी-तूफान ने क्षेत्र की जर्जर बिजली व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। आंधी के कारण कई स्थानों पर बड़े पेड़ उखड़कर बिजली लाइनों पर गिर गए, जिससे खंभे टूट गए और 33 किलोवाट की मुख्य आपूर्ति लाइन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के सात दिन बीत जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल न होना विद्युत विभाग की गंभीर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है।

बच्चों की पढ़ाई से घरेलू कामकाज तक, ग्रामीणों का संघर्ष जारी
बिजली के अभाव में लेमरू के कुटुरवा क्षेत्र के निवासियों का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थानीय निवासी सुनीता बाई बताती हैं कि पिछले सात दिनों से रात का समय उनके लिए किसी सजा से कम नहीं है। बिजली नहीं होने के कारण स्कूली बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, और खाना पकाने से लेकर पानी भरने तक के दैनिक कार्य करना भी मुश्किल हो गया है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध यह इलाका आज मूलभूत सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करने को मजबूर है, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है।

20 गांव अंधेरे में: बुनियादी ढांचा ध्वस्त, मरम्मत का कार्य बेहद धीमा
तेज आंधी के दौरान हुए नुकसान का दायरा काफी बड़ा है। नकिया, डोकरमना, लामपहाड़, चरईझुंझ, कापूडांड, सीलीभूड़ और चिंगरखुदरी समेत करीब 20 गांवों में मेन लाइन सप्लाई बाधित होने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। सड़क के किनारे लगे पेड़ों के गिरने से न केवल खंभे धराशायी हुए, बल्कि तार भी कई टुकड़ों में टूट गए हैं। आलम यह है कि सूरज ढलते ही पूरे क्षेत्र में सन्नाटा और घना अंधेरा पसर जाता है। बिजली के अभाव में जंगली जानवरों का भय भी ग्रामीणों को सता रहा है, जिससे उनकी असुरक्षा और बढ़ गई है।
आर्थिक संकट और व्यवसाय पर बिजली कटौती का गहरा नकारात्मक प्रभाव
केवल घरेलू जीवन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के छोटे व्यवसायी भी भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। स्थानीय व्यापारी संपत राम का कहना है कि बिजली न होने से दुकानदारी पूरी तरह बंद है और कामकाज ठप पड़ा है। ग्रामीण चम्पा बाई और अन्य निवासियों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समस्या केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि समय पर रखरखाव न होना भी है। यदि समय रहते तारों और खंभों का व्यवस्थित रख-रखाव किया जाता, तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता था।
अधिकारियों का दावा और ग्रामीणों की हताशा भरी प्रतीक्षा
विद्युत विभाग के डी.ई. ग्रामीण, शत्रुघन सोनी का कहना है कि मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है और कुछ चुनिंदा इलाकों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि शेष प्रभावित क्षेत्रों में 19 जून से काम में और तेजी लाई जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी सभी गांवों में उजाला न होना विभाग की सुस्त कार्यशैली का सबूत है। क्षेत्र के लोग अब इस डर में जी रहे हैं कि कहीं उन्हें और एक हफ्ता इसी अंधेरे में न बिताना पड़े। यह समस्या इलाके के लिए नई नहीं है, हल्की बारिश या हवा में अक्सर बिजली गुल होना यहां की नियति बन गई है, जिससे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।

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