Korea Crime : छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का शांत इलाका इन दिनों एक वीभत्स हत्याकांड की आग में झुलस रहा है। जिले के नौगईं गांव में घटी एक घटना ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है, जहां रेत के अवैध कारोबार और वर्चस्व की लड़ाई के चलते तीन लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। इस घटना में भाजपा के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह को जिंदा जला दिया गया, जबकि उनके सहयोगियों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। यह मामला महज एक आपसी रंजिश का नहीं, बल्कि लंबे समय से पनप रहे रेत के अवैध साम्राज्य और प्रशासनिक ढिलाई का दुखद परिणाम है।

विवाद की जड़: रेत घाट का ठेका और अवैध वसूली का तंत्र
इस खूनी संघर्ष के पीछे रेत के अवैध खनन का काला कारोबार मुख्य कारण है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब चिरमी स्थित रेत घाट का ठेका लल्ला सिंह के परिवार के नाम आवंटित हुआ। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार लल्ला सिंह और उनका परिवार कथित तौर पर इलाके के सोनहत, कैलाशपुर, तेलीमुड़ा और बेलिया जैसे क्षेत्रों से निकलने वाली रेत पर अवैध वसूली कर रहा था। आरोप है कि उनके गुर्गे फॉर्च्यूनर गाड़ियों में हूटर बजाते हुए चलते थे और हर हाईवा से 1000 रुपये की अवैध वसूली करते थे। वहीं दूसरी ओर, त्रिपाठी परिवार के पास भी कुछ टीपर थे, जो रेत निकाल कर बैकुंठपुर में बेचते थे। वे लल्ला सिंह को अवैध शुल्क देने से इनकार कर रहे थे, जिससे पिछले आठ महीनों से दोनों परिवारों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी।

घटनाक्रम: सुलह की कोशिश बनी मौत का जाल
मंगलवार, 16 जून की रात नौगईं गांव में स्थिति तब बिगड़ गई जब समझौता वार्ता खूनी खेल में बदल गई। लल्ला सिंह अपने परिजनों और सहयोगियों के साथ नौगईं पहुंचे थे। सिंह परिवार का दावा है कि वे विवाद सुलझाने के लिए गए थे, लेकिन त्रिपाठी परिवार ने पहले से ही योजना बना रखी थी। जैसे ही लल्ला सिंह की गाड़ियों का काफिला वहां पहुंचा, हमलावरों ने हाइवा ट्रक की मदद से रास्ता रोक लिया। बचाव के लिए जब लल्ला सिंह ने गाड़ी मोड़ने की कोशिश की, तो उन्हें हाइवा से टक्कर मारी गई। गाड़ी के लॉक हो जाने के बाद, हमलावरों ने पेट्रोल डालकर कार को आग के हवाले कर दिया। आग की लपटों में घिरे लल्ला सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके चचेरे भाई नागेंद्र सिंह और विरेंद्र सिंह बुरी तरह झुलस गए, जिनकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई।
राजनीतिक कनेक्शन और प्रशासनिक विफलता पर सवाल
भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह बैकुंठपुर के विधायक भैयालाल राजवाड़े के करीबी माने जाते थे। वहीं, मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा विधायक रेणुका सिंह के खेमे से जुड़ा बताया जा रहा है। इस हत्याकांड ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। लल्ला सिंह के परिजनों का आरोप है कि रेणुका सिंह के दबाव में पहले पुलिस ने हूटर हटाने की कार्रवाई की थी, जिससे तनाव और बढ़ गया। अब पीड़ित परिवार आरोपियों के एनकाउंटर और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। घटना के बाद से ही क्षेत्र में दहशत का माहौल है और स्थानीय जनता में प्रशासन की कार्यप्रणाली के प्रति गहरा आक्रोश है।
धारा 163 का प्रवर्तन: तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश
घटना की भयावहता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाए हैं। कोरिया जिला कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिए हैं। बैकुंठपुर के महलपारा, नौगईं और कटगोड़ी स्थित केशर प्लांट के आसपास के 300 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। इन क्षेत्रों में अब किसी भी प्रकार के जुलूस, धरना, प्रदर्शन या सार्वजनिक सभा पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके अलावा, हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों के साथ चलने पर भी रोक लगाई गई है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए इन इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है।

कानूनी कार्रवाई: 9 नामजद आरोपी और जारी है तलाश
सरगुजा आईजी दीपक झा के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनहत थाने में कुल 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मनोज त्रिपाठी, निशांत त्रिपाठी, विशाल त्रिपाठी और सत्यप्रकाश त्रिपाठी समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अन्य 5 आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। पुलिस प्रशासन ने दावा किया है कि फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी तेज कर दी गई है और जल्द ही सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
क्षेत्र का सामाजिक और आर्थिक ताना-बाना
रेत के इस अवैध कारोबार ने न केवल राजनीति को दूषित किया है, बल्कि आम लोगों के जीवन को भी खतरे में डाल दिया है। सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाकर रेत माफिया बेलगाम हो गए हैं। इस हत्याकांड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब राजनीति और अपराध का गठजोड़ होता है, तो उसका खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ता है। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में केवल छोटे प्यादों पर कार्रवाई होगी या उन सफेदपोशों तक भी आंच पहुंचेगी जो इस पूरे अवैध कारोबार को पर्दे के पीछे से संरक्षण दे रहे थे। फिलहाल, कोरिया की जनता न्याय की बाट जोह रही है।
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