Koyel Mallik Resignation : पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहा उथल-पुथल का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह सुगबुगाहट तेज थी कि प्रसिद्ध टॉलीवुड अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद कोयल मल्लिक राज्यसभा से इस्तीफा दे सकती हैं। आखिरकार गुरुवार को इन तमाम कयासों और अफवाहों पर मुहर लग गई जब उन्होंने आधिकारिक तौर पर संसद के उच्च सदन की सदस्यता छोड़ दी। कोयल मल्लिक का यह कदम तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक पहले ही एक-एक करके राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं।

तृणमूल कांग्रेस का संख्या बल बुरी तरह घटा
टॉलीवुड अभिनेत्री कोयल मल्लिक के इस अचानक इस्तीफे के साथ ही राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत बेहद कमजोर हो गई है। संसद के इस उच्च सदन में टीएमसी के सांसदों की कुल संख्या 13 से घटकर अब महज 9 रह गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा में पार्टी अब लगभग वजूद के संकट से जूझ रही है। इतना ही नहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी खबर सामने आ रही है कि इसी हफ्ते कुछ और सांसद भी अपने पदों से त्यागपत्र दे सकते हैं, जिससे आने वाले दिनों में ममता बनर्जी की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।

ममता-अभिषेक के नेतृत्व को अपनों ने नकारा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली अप्रत्याशित हार के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस के भीतर सांगठनिक बिखराव की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। पार्टी के भीतर असंतोष इस कदर बढ़ चुका है कि रीताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल संसदीय दल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से पूरी तरह दूरी बना ली है। बताया जा रहा है कि बागी गुट के पास वर्तमान में लगभग 64 विधायकों का समर्थन हासिल है। इस आंतरिक कलह का असर अब संसद के दोनों सदनों में साफ तौर पर दिखने लगा है, जहां पार्टी के भीतर ही एक नई समानांतर तृणमूल खड़ी होती दिखाई दे रही है।
लोकसभा में भी बगावत तेज
संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में भी तृणमूल कांग्रेस को एक बहुत बड़े विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता काकली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में लगभग 20 लोकसभा सांसदों ने एक अलग गुट बना लिया है। इन सभी बागी सांसदों ने केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने के लिए बकायदा अपनी लिखित सहमति और चिट्ठी भेज दी है। लोकसभा के इन सांसदों के पाला बदलने की तैयारी ने राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी की राजनीतिक साख और ताकत को बहुत गहरी चोट पहुंचाई है।
राज्यसभा में बागी सांसदों ने अपनाया नया फॉर्मूला
संसद के ऊपरी सदन (राज्यसभा) में भी बगावत का वही पुराना पैटर्न देखा जा रहा है, लेकिन यहाँ रणनीति थोड़ी अलग है। दलबदल विरोधी कानून के तहत राज्यसभा में एक साथ दो-तिहाई सांसदों का गुट बनाना बेहद जटिल काम है, इसलिए बागी सांसदों ने सामूहिक विद्रोह के बजाय एक-एक करके इस्तीफा देने का अनोखा रास्ता चुना है। इसकी शुरुआत सुखेंदु शेखर रॉय ने की थी, जिसके बाद सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाइक और अब कोयल मल्लिक ने पद छोड़ दिया। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, अगले हफ्ते दो से तीन और सांसद इस्तीफा दे सकते हैं। वर्तमान विधायी स्थिति को देखते हुए यदि इन सीटों पर उपचुनाव होते हैं, तो इन सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत तय मानी जा रही है।
दो महीने के भीतर ही टीएमसी से बनाई दूरी
दिलचस्प बात यह है कि इसी साल फरवरी महीने में तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की जो सूची जारी की थी, उसमें राजीव कुमार, बाबुल सुप्रियो और मेनका गुरुस्वामी के साथ अभिनेत्री कोयल मल्लिक का नाम भी प्रमुखता से शामिल था। इसके बाद अप्रैल में कोयल अपने पूरे परिवार के साथ दिल्ली गईं और सांसद के रूप में शपथ ली थी। उस समय उन्होंने देश और जनता की सेवा को सबसे बड़ा सौभाग्य बताया था, लेकिन पार्टी की चुनावी हार और आंतरिक कलह को देखते हुए उन्होंने दो महीने के भीतर ही इस्तीफा देकर टीएमसी से अपनी पूरी दूरी बना ली है।
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