Lakhimpur Kheri Case: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल सकी। गुरुवार को सर्वोच्च अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें जमानत की शर्तों में और ढील देने की मांग की गई थी। आशीष मिश्रा ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें अपने पैतृक स्थान पर जाकर पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने की अनुमति दी जाए। मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है, इसलिए याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।

पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने की दी थी दलील
सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मौजूदा जमानत शर्तों के कारण उनके मुवक्किल अपनी बेटियों के जन्मदिन जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने अदालत से इन परिस्थितियों को देखते हुए शर्तों में कुछ राहत देने का अनुरोध किया। हालांकि पीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि फिलहाल जमानत की मौजूदा शर्तों में बदलाव करने का कोई कारण दिखाई नहीं देता।

ट्रायल की प्रक्रिया पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान पीड़ित किसानों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्रायल की प्रक्रिया को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि मुकदमे की सुनवाई जिस गति से आगे बढ़ रही है, उसके कारण कई महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही दर्ज नहीं हो पा रही है। उनके अनुसार कई चश्मदीद गवाहों को अगले ही दिन अदालत में उपस्थित होने के लिए बुलाया जाता है और यदि वे निर्धारित समय पर नहीं पहुंच पाते, तो उन्हें गवाहों की सूची से हटा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित हो सकती है।
प्रशांत भूषण ने अदालत के सामने रखी आपत्तियां
प्रशांत भूषण ने कहा कि वह इस संबंध में अलग से याचिका दाखिल करना चाहते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि ऐसी शिकायतों को सबसे पहले ट्रायल कोर्ट के समक्ष उठाया जाना चाहिए। अदालत ने सुझाव दिया कि यदि कोई गवाह महत्वपूर्ण है, तो ट्रायल कोर्ट को यह बताया जाए कि उसकी गवाही मामले के लिए क्यों आवश्यक है। जब भूषण ने कहा कि इनमें कुछ प्रत्यक्षदर्शी भी शामिल हैं, तो पीठ ने दोहराया कि इस विषय पर पहले निचली अदालत से ही उचित राहत मांगी जानी चाहिए।
गवाहों और दस्तावेजों का भी हुआ उल्लेख
सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कुछ दस्तावेजों के अनुवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए कहा कि एक व्यक्ति के खिलाफ कथित रूप से गवाह को प्रभावित करने की कोशिश करने के आरोप में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि जिस गवाह को कथित तौर पर धमकाया गया था, उसे बाद में गवाहों की सूची से हटा दिया गया। अब उस गवाह ने ट्रायल में शामिल होने की अनुमति के लिए आवेदन दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस आवेदन पर उचित समय पर विचार किया जाएगा और ट्रायल कोर्ट के समक्ष आवश्यक तथ्यों को रखा जाना चाहिए।

क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा मामला
यह मामला 3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में हुई हिंसा से जुड़ा है। उस दिन तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के प्रस्तावित दौरे के विरोध में किसान प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान एक एसयूवी वाहन ने चार किसानों को कुचल दिया, जिसके बाद क्षेत्र में हिंसा भड़क गई। बाद की घटनाओं में वाहन चालक और दो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम में एक पत्रकार की भी जान चली गई थी। इस प्रकार कुल आठ लोगों की मृत्यु हुई। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अब भी जारी है तथा इस पर देशभर की निगाहें बनी हुई हैं।
Read More : Shashi Tharoor on FCRA: FCRA बिल पर शशि थरूर का हमला, सरकार और संस्थाओं के रिश्तों पर सवाल












