मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में बाल कल्याण समिति की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहां एक नाबालिग रेप पीड़िता को आरोपी के घर भेज दिया गया। इसके बाद उससे दोबारा दुष्कर्म किया गया। इस मामले में छतरपुर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष, पांच सदस्य, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक, काउंसलर, केस वर्कर और एक अन्य महिला समेत कुल 10 लोगों पर विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की है। हालांकि, अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

छतरपुर पुलिस की कार्रवाई और जांच
लवकुशनगर (छतरपुर) एसडीओपी नवीन दुबे ने बताया कि बाल कल्याण समिति और अधिकारियों के गलत फैसले के कारण पीड़िता को दोबारा दुष्कर्म का शिकार होना पड़ा। जांच में यह भी उजागर हुआ कि जिला कार्यक्रम अधिकारी और वन स्टॉप सेंटर के कर्मचारी इस मामले को दबाने की कोशिश कर रहे थे। इस गंभीर कृत्य के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

आरोपियों पर लगे कानून के तहत कड़े प्रावधान
पुलिस ने बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष भानू जड़िया और सदस्यों अंजलि भदौरिया, आशीष बोस, सुदीप श्रीवास्तव व प्रमोद कुमार सिंह पर पॉक्सो एक्ट की धारा 17 के तहत आरोप लगाए हैं, जो अपराध को बढ़ावा देने से संबंधित है। वहीं, वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक कविता पांडे, काउंसलर प्रियंका सिंह और केस वर्कर शिवानी शर्मा पर पॉक्सो एक्ट की धारा 21 (बाल यौन अपराध की रिपोर्ट नहीं करने पर) लागू की गई है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अवधेश सिंह पर पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के साथ-साथ SC-ST एक्ट की धारा 4 तथा BNS की धारा 199 व 239 (कानून के विपरीत काम करने पर) भी दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, अंजलि कुशवाहा के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 82 (बच्चों को शारीरिक दंड देने पर) में मामला दर्ज किया गया है।
मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता की सुरक्षा
यह मामला और भी जटिल इसलिए है क्योंकि लड़की और आरोपी दोनों अलग-अलग गांव और जाति के हैं। आरोपी ने लड़की को दिल्ली ले जाकर गुरुग्राम से पकड़वाया गया। पन्ना कोतवाली में मामला दर्ज कर जुझार नगर थाना को भेजा गया। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पन्ना में बाल सुधार गृह न होने के कारण जांच की जिम्मेदारी छतरपुर पुलिस को दी गई है।
समाज में बाल सुरक्षा की आवश्यकता
यह घटना मध्यप्रदेश में बाल सुरक्षा और बाल कल्याण समितियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। नाबालिग पीड़िता को आरोपी के घर भेजना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है बल्कि बाल सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों का उल्लंघन भी है। ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
मध्यप्रदेश के पन्ना में बाल कल्याण समिति की लापरवाही से नाबालिग पीड़िता को दोबारा दुष्कर्म का शिकार होना अत्यंत शर्मनाक है। छतरपुर पुलिस की तत्परता से FIR दर्ज करना सकारात्मक कदम है, परंतु आरोपी अभी भी फरार हैं। जल्द से जल्द सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके और बच्चों को सुरक्षित माहौल मिल सके।











