Lashkar-e-Toiba OGW
Lashkar-e-Toiba OGW: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति को दोहराते हुए मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई की है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकी संगठनों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के साथ संलिप्तता पाए जाने पर 5 सरकारी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। जांच में सामने आया है कि इन कर्मचारियों को आईएसआई द्वारा रणनीतिक रूप से सरकारी तंत्र के भीतर प्लांट किया गया था ताकि वे राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को अंजाम दे सकें। इन सभी के तार लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे खतरनाक संगठनों से जुड़े पाए गए हैं।
प्रशासन ने इन कर्मचारियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (c) के तहत सेवामुक्त किया है, जो राज्य की सुरक्षा के हित में बिना किसी औपचारिक जांच के बर्खास्तगी का अधिकार देता है। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में शिक्षा विभाग का एक शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग का एक लैब टेक्नीशियन और एक ड्राइवर, जल शक्ति विभाग (PHE) का असिस्टेंट लाइनमैन और वन विभाग का एक फील्ड वर्कर शामिल है। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, ये लोग सरकारी वेतन लेकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले नेटवर्क का हिस्सा थे।
बर्खास्त कर्मचारियों के कारनामे बेहद चौंकाने वाले हैं:
मोहम्मद इश्तियाक (शिक्षक): लश्कर कमांडर अबू खुबैब के संपर्क में था और इसे 2022 में एक पुलिस अधिकारी की हत्या का जिम्मा सौंपा गया था।
तारिक अहमद राह (लैब टेक्नीशियन): हिजबुल मुजाहिदीन के प्रभाव में था और इसने आतंकियों को पाकिस्तान भागने में मदद की थी।
बशीर अहमद मीर (असिस्टेंट लाइनमैन): बांदीपोरा में लश्कर के सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम करते हुए सुरक्षा बलों की जानकारी लीक करता था।
फारूक अहमद भट (वन विभाग): हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़ा था और आतंकी नेटवर्क के लिए संपर्क सूत्र की भूमिका निभा रहा था।
मोहम्मद यूसुफ (ड्राइवर): इसके पास से जुलाई 2024 में पिस्तौल, ग्रेनेड और 5 लाख रुपये नकद बरामद हुए थे। यह हथियारों और आतंकी फंडिंग की सप्लाई करता था।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 2021 में जम्मू-कश्मीर के भीतर छिपे “सफेदपोश आतंकियों” और उनके इकोसिस्टम को खत्म करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2021 से अब तक 85 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को टेरर लिंक के कारण सेवा से हटाया जा चुका है। प्रशासन का मानना है कि सरकारी मशीनरी के भीतर बैठे ये लोग आतंकवाद के लिए ऑक्सीजन का काम करते हैं, और इनका सफाया आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह तोड़ने के लिए अनिवार्य है।
यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 8 जनवरी को दिल्ली में ली गई उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के ठीक बाद हुई है। उस बैठक में गृह मंत्री ने सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को ‘मिशन मोड’ में काम करने और आतंकी फंडिंग व उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को जड़ से खत्म करने का निर्देश दिया था। सरकार की इस कड़ी कार्रवाई से उन तत्वों को स्पष्ट संदेश गया है जो देश की संप्रभुता के खिलाफ किसी भी रूप में आतंक का समर्थन कर रहे हैं।
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