India-US Trade Deal 2026
India-US Trade Deal 2026: अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबी और कट्टर समर्थक माने जाने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम के रुख में भारत को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव आया है। यह वही ग्राहम हैं, जिन्होंने कभी भारत पर 500 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने की वकालत की थी और इस संबंध में अमेरिकी संसद में एक कड़ा बिल भी पेश किया था। हालांकि, वह बिल कानून का रूप नहीं ले सका, लेकिन उनके बयानों ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को बढ़ा दिया था। अब, भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद ग्राहम के सुर पूरी तरह बदल गए हैं। उन्होंने न केवल भारत की प्रशंसा की है, बल्कि यह भी कहा है कि भारत ने अपनी नई नीतियों के जरिए टैरिफ में मिली इस कटौती को पूरी तरह “डिजर्व” किया है।
लिंडसे ग्राहम ने भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद कम करने या रोकने की सहमति को एक रणनीतिक “मास्टरस्ट्रोक” करार दिया है। ग्राहम का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने का एकमात्र रास्ता पुतिन की अर्थव्यवस्था पर चोट करना है। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संदेश अब पूरी दुनिया में असर दिखा रहा है। उनके अनुसार, पुतिन तभी शांति वार्ता की मेज पर आएंगे जब रूस को होने वाली तेल की कमाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। भारत जैसा बड़ा ग्राहक जब रूस से दूरी बनाता है, तो यह पुतिन के लिए एक असहनीय आर्थिक दबाव पैदा करता है, जो युद्ध विराम की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना करते हुए लिखा, “शानदार काम, राष्ट्रपति ट्रंप। पुतिन के ग्राहक अब अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने को मजबूर हो रहे हैं।” ग्राहम ने आगे कहा कि भारत ने अपने आचरण और वैश्विक शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से यह टैरिफ कटौती हासिल की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन और अन्य बड़े देश भी भारत का अनुसरण करेंगे। ग्राहम के शब्दों में, “यूक्रेन में जारी खून-खराबा अब रुकना चाहिए और भारत का यह कदम हमें उसी शांतिपूर्ण भविष्य की ओर ले जा रहा है।” यह बयान दर्शाता है कि अमेरिकी सत्ता प्रतिष्ठान अब भारत को एक भरोसेमंद वैश्विक साझीदार के रूप में देख रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुआ वह बड़ा समझौता है, जिसने द्विपक्षीय व्यापार की दिशा बदल दी है। इस डील के तहत, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। ट्रंप का दावा है कि भारत अब रूस के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला से तेल की अपनी जरूरतों को पूरा करेगा। इसके बदले में, भारत ने अपने बाजारों को अमेरिकी उत्पादों के लिए अधिक सुलभ बनाने और कई व्यापारिक बाधाओं को हटाने पर सहमति जताई है। यह ‘गिव एंड टेक’ की नीति दोनों देशों के आर्थिक हितों को सुरक्षित करने वाली मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते का गर्मजोशी से स्वागत किया है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को अपना “प्रिय मित्र” बताते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक और रणनीतिक पोस्ट साझा की। पीएम मोदी ने लिखा कि ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैक्स का कम होना भारतीय उद्यमियों और कामगारों के लिए एक बड़ी जीत है। उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त किया। यह समझौता न केवल भारत की निर्यात क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि अमेरिका के साथ भारत के ‘रणनीतिक और व्यापारिक’ संबंधों को एक नई धुरी प्रदान करेगा, जो चीन जैसे देशों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
लिंडसे ग्राहम जैसे कड़े आलोचक का प्रशंसक बन जाना इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी आर्थिक शक्ति का उपयोग कूटनीतिक जीत हासिल करने के लिए बखूबी कर रहा है। रूस और अमेरिका के बीच संतुलन बिठाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना भारत की नई विदेश नीति की सफलता है। आने वाले समय में यह व्यापार समझौता न केवल दोनों देशों की जीडीपी को गति देगा, बल्कि दक्षिण एशिया और यूरोप के भू-राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेगा।
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