Living Doll : अमेरिका की केली मेपल हाल ही में अपनी प्यारी सी ‘बेटी’ नाओमी को शॉपिंग मॉल लेकर गईं। महंगे पेराम्बुलेटर में सजी नाओमी को देखकर लोग यही समझे कि वह मेपल की संतान है। लेकिन असल में नाओमी कोई इंसानी बच्ची नहीं, बल्कि एक बेहद यथार्थवादी रीबॉर्न डॉल है—एक ऐसी गुड़िया, जो हूबहू नवजात शिशु जैसी दिखती है। इस गुड़िया की कीमत 8 से 10 हजार डॉलर यानी लगभग 12 लाख रुपये है।
रीबॉर्न डॉल्स की शुरुआत 21वीं सदी की शुरुआत में हुई थी, लेकिन हाल के वर्षों में इनकी लोकप्रियता ने तेज़ी से रफ्तार पकड़ी है। इन डॉल्स को खरीदने वाले लोग उन्हें अपने बच्चों की तरह पालते हैं—उन्हें कपड़े पहनाते हैं, घुमाने ले जाते हैं और अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं।
ब्राज़ील में इन डॉल्स को लेकर सामाजिक बहस इतनी तेज़ हो गई है कि सार्वजनिक स्थानों पर इनके उपयोग पर रोक लगाने का विधेयक सामने आ गया है। वहीं अमेरिका में यह एक “कुटीर उद्योग” बन चुका है। कई लोग अपने घरों के तहखानों में ये डॉल्स हाथ से बनाते हैं और ऑनलाइन बेचते हैं। इनकी त्वचा, नसें और बाल इतने वास्तविक लगते हैं कि असली और नकली में फर्क कर पाना मुश्किल हो जाता है।
केली मेपल इस दुनिया की जानी-मानी हस्ती हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर दो मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर हैं। वे महीनों मेहनत करके गुड़ियां बनाती हैं और ‘नर्सरी’ नाम के स्टॉल में उन्हें अंतरराष्ट्रीय मेलों में बेचती हैं। उन्होंने बताया, “मेरी नर्सरी में हर जगह सिर और अंग बिखरे रहते हैं, लेकिन यह मेरे लिए कला है।”
Reborns.com जैसी वेबसाइटें इन डॉल्स का सबसे बड़ा ऑनलाइन बाज़ार हैं। इसके संस्थापक डेव स्टैक के अनुसार, उनकी साइट पर 600 से अधिक सक्रिय कलाकार हैं जो महीने में 30 डॉलर देकर अपने प्रोडक्ट बेचते हैं। उत्तरी कैरोलिना जैसे शहरों में खास मेले होते हैं जहाँ डॉल प्रेमी और कारीगर इकट्ठा होते हैं, एक-दूसरे को उपहार देते हैं और कला सिखाते हैं।
एक मेले में भाग लेने आए ओशन नॉरिस और उनकी दोस्त एंजेला सिमंस ने बताया कि उन्हें लगा ये बच्चे असली हैं। सिमंस कहती हैं, “जैसे इन डॉल्स के साथ व्यवहार होता है, वैसा तो असली बच्चों के साथ भी कई बार नहीं होता।”
इस सवाल का जवाब भावनाओं में छिपा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई महिलाएं जिन्होंने गर्भपात का अनुभव किया है या अपने बच्चों को खोया है, वे इन डॉल्स को अपने जीवन में सहारा मानती हैं। अल्ज़ाइमर, डिमेंशिया, PTSD और ऑटिज़्म जैसी मानसिक स्थितियों से जूझ रहे लोग भी इन डॉल्स से मानसिक राहत पाते हैं। कुछ नामी हस्तियाँ जैसे ब्रिटनी स्पीयर्स भी ऐसी गुड़ियों के साथ देखी गई हैं।
रीबॉर्न डॉल्स सिर्फ सजावटी खिलौने नहीं हैं। ये कई लोगों के लिए भावनात्मक सहारा, मानसिक चिकित्सा का माध्यम और अधूरे मातृत्व की पूर्ति हैं। यही वजह है कि लाखों रुपये की कीमत के बावजूद इन डॉल्स का बाज़ार दुनियाभर में फलफूल रहा है।
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