Lok Sabha Update: संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों के सदस्यों ने देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के गंभीर मामलों को लेकर सदन के भीतर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा की बैठक को एक बार के संक्षिप्त स्थगन के बाद अंततः पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा।

जन्म और मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक बिना चर्चा के पारित
सदन के अंदर जारी भारी शोर-शराबे और हंगामे के बीच ही एक महत्वपूर्ण विधाई कार्य को पूरा किया गया। विपक्षी सदस्यों के विरोध के बावजूद लोकसभा ने जन्म और मृत्यु के पंजीकरण संबंधी कानून में संशोधन करने के प्रावधान वाले महत्वपूर्ण विधेयक को बिना किसी चर्चा के ही ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार ने इस विधेयक को हंगामे के बीच ही आगे बढ़ाया और सदन की मुहर लगवा ली।

गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर वेल में प्रदर्शन
जैसे ही सदन की बैठक सुबह निर्धारित समय पर शुरू हुई, विपक्षी दलों के तमाम सांसद तख्तियां और बैनर लेकर आसन के समीप (वेल में) आ पहुंचे। विपक्षी सदस्यों ने पुलिस की कार्रवाई के विरोध में कड़े नारे लगाए और देश के गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की जोरदार मांग की। विपक्षी दलों के इस आक्रामक रुख के कारण सदन का माहौल शुरुआती पलों से ही काफी गर्म हो गया था।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की प्रश्नकाल चलने देने की अपील
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों से बार-बार अपने-अपने स्थान पर वापस जाने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। अध्यक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रश्नकाल सदन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है जो विशेष रूप से सदस्यों के लिए होता है। उन्होंने विपक्षी सांसदों को हिदायत दी कि वे प्रश्नकाल के दौरान नियोजित तरीके से किसी भी तरह का गतिरोध पैदा करने से परहेज करें।
प्रियंका गांधी का प्रश्न और कार्यवाही बाधित होने का जिक्र
सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष ओम बिरला ने एक विशेष उदाहरण देते हुए कहा कि आज सदन में सांसद प्रियंका गांधी का भी महत्वपूर्ण प्रश्न सूचीबद्ध है और वह अपना प्रश्न पूछने के लिए अपनी जगह पर खड़ी भी हैं, लेकिन विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही पूरी तरह बाधित हो रही है। अध्यक्ष ने कहा कि सदस्यों को सदन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार की बाधाओं से बचना चाहिए।
तख्तियां और बैनर लाने पर अध्यक्ष की कड़ी आपत्ति
लोकसभा अध्यक्ष ने सदन के भीतर तख्तियां और बैनर लेकर आने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह का आचरण संसद की महान परंपराओं और स्थापित संसदीय मर्यादाओं के बिल्कुल विपरीत है। अध्यक्ष ने सदन की गरिमा का हवाला देते हुए कहा कि संसद सदस्यों से यह उम्मीद की जाती है कि वे सदन के नियमों का पूर्ण पालन करेंगे और इसकी पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखेंगे।
भेष बदलकर आने वाले सदस्यों को अध्यक्ष की सख्त चेतावनी
अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में सुरक्षा और नियमों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कुछ माननीय सदस्य जिस तरह से भेष बदलकर संसद भवन में आ रहे हैं, यह उनके लिए एक गंभीर चेतावनी है। अध्यक्ष ने खुलासा किया कि कई अन्य सदस्यों ने उनसे मिलकर और लिखित में शिकायत की है कि संसद परिसर की पवित्रता और मर्यादा को बनाए रखा जाना चाहिए।
पवित्रता और गरिमा समाप्त करने का गंभीर आरोप
संसद परिसर की गरिमा पर बोलते हुए अध्यक्ष ने कहा कि कुछ सांसदों के ऐसे आपत्तिजनक और अनुचित आचरण के कारण संसद की पवित्रता और गरिमा धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। उन्होंने सदस्यों को चेतावनी दी कि वे सदन के नियमों के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखें। जब इसके बावजूद विपक्षी सदस्यों का शोर-शराबा और हंगामा नहीं थमा, तो अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
बारह बजे कार्यवाही फिर शुरू होने पर भी जारी रहा गतिरोध
दोपहर 12 बजे जब लोकसभा की बैठक दोबारा शुरू हुई, तब भी सदन के भीतर हंगामे और विरोध-प्रदर्शन की स्थिति जस की तस बनी हुई थी। विपक्षी सांसदों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था और वे लगातार नारेबाजी कर रहे थे। इसी माहौल के बीच पीठासीन सभापति ने विधायी कामकाज को आगे बढ़ाते हुए जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन के समक्ष रखा और बिना चर्चा के पारित घोषित कर दिया।
सोमवार तक के लिए सदन की अंतिम बैठक स्थगित
हंगामे के बीच विधेयक पारित होने के तुरंत बाद पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने सदन की आगे की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए न बढ़ाते हुए आगामी सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिए जाने की औपचारिक घोषणा कर दी। इसके साथ ही शुक्रवार को सदन की कार्यवाही का समापन हो गया और सांसद सदन से बाहर चले गए।
मानसून सत्र की शुरुआत से ही जारी है हंगामे का दौर
संसद के वर्तमान मानसून सत्र की शुरुआत इसी साल 20 जुलाई को हुई थी। सत्र के पहले दिन से लेकर आज तक सदन में विभिन्न ज्वलंत मुद्दों और राजनीतिक विवादों के कारण लगातार हंगामे की स्थिति बनी हुई है। आलम यह है कि इस सत्र के दौरान अब तक एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल सुचारू रूप से नहीं चल पाए हैं, जिससे विधाई कार्यों पर भी गहरा असर पड़ा है।












