Lok Sabha Adjourned
Lok Sabha Adjourned: संसद के बजट सत्र का 13वां दिन भारी शोर-शराबे और हंगामे की भेंट चढ़ गया। शुक्रवार को जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सदन की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। ‘हरदीप पुरी इस्तीफा दो’ के नारों से पूरा सदन गूंज उठा। हंगामे की तीव्रता को देखते हुए अध्यक्ष ने कार्यवाही शुरू होने के मात्र 5 मिनट के भीतर ही सदन को स्थगित कर दिया। इस व्यवधान के कारण प्रश्नकाल और अन्य महत्वपूर्ण विधायी कार्य सुचारू रूप से नहीं चल सके।
दोपहर 12 बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तब भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिखा। विपक्ष का हंगामा बदस्तूर जारी रहा। हालांकि, इस शोर-शराबे के बीच सरकार ने रणनीतिक रूप से शिक्षा (Education) और कानून (Law) मंत्रालय से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पटल पर रखा। चेयर पर मौजूद संध्या राय ने अव्यवस्था को देखते हुए आवश्यक विधायी कार्यों को निपटाया। विपक्षी सांसद लगातार वेल में आकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके कारण किसी भी विषय पर सार्थक चर्चा संभव नहीं हो सकी। अंततः, सदन की गरिमा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लोकसभा को 9 मार्च तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी गई।
संसद का यह बजट सत्र पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। सत्र का पहला चरण 28 जनवरी को शुरू हुआ था, जो आज यानी 13 फरवरी को संपन्न हो गया। अब संसद में 23 दिनों का लंबा अवकाश रहेगा। इस अंतराल के बाद, बजट सत्र का दूसरा और अंतिम चरण 9 मार्च से शुरू होगा। यह चरण विधायी कार्यों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा और 2 अप्रैल तक चलेगा। ब्रेक के दौरान विभिन्न संसदीय समितियां अनुदान मांगों और बजट प्रस्तावों की बारीकी से जांच करेंगी।
सदन की कार्यवाही के इतर, राजनीतिक गलियारों में उस समय सरगर्मी बढ़ गई जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। दुबे ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राहुल गांधी सत्ता हथियाने के लिए देश के भीतर खतरनाक साजिशें रच रहे हैं। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि राहुल गांधी “देश के बंटवारे की प्लानिंग” कर रहे थे ताकि वे किसी भी तरह सत्ता तक पहुँच सकें। निशिकांत दुबे के इन आरोपों ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट को और बढ़ा दिया है, जिसका असर सत्र के दूसरे चरण में भी देखने को मिल सकता है।
सत्र के पहले चरण का इस तरह हंगामे के साथ समाप्त होना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक चिंता का विषय है। बजट जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के बजाय व्यक्तिगत आरोपों और इस्तीफे की मांग के कारण जनता के पैसे और समय का नुकसान हो रहा है। विपक्ष जहाँ सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष ने भी पलटवार की नीति अपनाई है। अब सभी की निगाहें 9 मार्च पर टिकी हैं, जब सदन दोबारा मिलेगा और बजट पर विस्तृत चर्चा की उम्मीद की जाएगी।
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