Naravane Report Controversy
Naravane Report Controversy: सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान उस समय एक नया विवाद खड़ा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चीन सीमा विवाद पर एक पत्रिका (मैगजीन) की रिपोर्ट का हवाला देने की कोशिश की। इस रिपोर्ट में पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अभी तक अप्रकाशित (Unpublished) आत्मकथा के कुछ कथित अंशों और उद्धरणों का उल्लेख किया गया था। जैसे ही राहुल गांधी ने इन संवेदनशील तथ्यों को सदन के पटल पर रखने का प्रयास किया, सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सदन के नियमों का हवाला देते हुए उन्हें अप्रकाशित सामग्री के आधार पर बोलने से रोक दिया।
इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जबरदस्त वैचारिक और कानूनी जंग छिड़ गई। सरकारी पक्ष का तर्क था कि सदन की मर्यादा और नियमों के अनुसार, किसी भी ऐसी सामग्री का उल्लेख नहीं किया जा सकता जो प्रमाणित या प्रकाशित न हो। दूसरी ओर, विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा से भाग रही है। विपक्ष का कहना था कि यदि पूर्व सेना प्रमुख ने सीमा की स्थिति पर कुछ महत्वपूर्ण तथ्य लिखे हैं, तो देश को वह सच जानने का पूरा अधिकार है। इस तीखी नोकझोंक ने सदन के माहौल को इतना तनावपूर्ण बना दिया कि कार्यवाही को पहली बार शाम 4 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
शाम 4 बजे जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो उम्मीद थी कि कामकाज सुचारू रूप से चलेगा। लेकिन राहुल गांधी ने एक बार फिर वही मुद्दा उठा दिया। उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि आखिर सरकार जनरल नरवणे की बातों से क्यों डर रही है? राहुल ने कहा कि सेना से जुड़ा सच देश से छिपाना सही नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब एक पूर्व सेना प्रमुख सीमा पर चुनौतियों की बात कर रहे हैं, तो उस पर सदन में चर्चा होना अनिवार्य है। इस बयान के बाद सदन में फिर से नारेबाजी और हंगामा शुरू हो गया।
सदन के भीतर बढ़ते हंगामे और अनियंत्रित शोर-शराबे को देखते हुए अध्यक्ष ओम बिड़ला ने लोकसभा की कार्यवाही को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। सदन स्थगित होने के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर के बाहर मीडिया से बात की। उन्होंने कड़े लहजे में कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा देशहित में जरूरी है। जनरल नरवणे ने अपनी किताब में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीमा की स्थितियों के बारे में जो लिखा है, वह गंभीर है। लेकिन विडंबना देखिए कि मुझे इस विषय पर सदन के भीतर बोलने से रोका जा रहा है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब और चीन का मुद्दा आने वाले दिनों में और भी गरमाने वाला है। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। वहीं, सरकार इसे सुरक्षा प्रोटोकॉल और सदन के नियमों के उल्लंघन के तौर पर पेश कर रही है। मंगलवार को जब सदन दोबारा मिलेगा, तो सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या विपक्ष को इस मुद्दे पर बोलने का मौका मिलता है या फिर से हंगामा कार्यवाही को निगल जाएगा। यह टकराव न केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच है, बल्कि यह देश की रक्षा नीति और सूचनाओं की पारदर्शिता के बीच के संघर्ष को भी दर्शाता है।
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