Lok Sabha Ruckus
Lok Sabha Ruckus: भारतीय संसद का बजट सत्र आज ऐतिहासिक उथल-पुथल का गवाह बन रहा है। सदन के भीतर एक ओर अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक संकट, विशेषकर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी जंग को लेकर चिंता जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू मोर्चे पर लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया के गंभीर हालातों पर सदन में तत्काल चर्चा की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि इस युद्ध का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है, इसलिए संसद को इस पर चुप नहीं रहना चाहिए। हालांकि, सरकार और विपक्ष के बीच सहमति न बन पाने के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है।
लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए आवश्यक 50 से अधिक सांसदों का समर्थन हासिल होने के बाद, पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने इसे स्वीकार कर लिया है। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि स्पीकर का रवैया ‘पक्षपातपूर्ण’ रहा है और वे विपक्षी सदस्यों को अपनी बात रखने का उचित अवसर प्रदान नहीं कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, जो सदन की कार्यप्रणाली के प्रति विपक्ष के गहरे असंतोष को दर्शाता है।
चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि स्पीकर की कुर्सी पर बैठने वाले व्यक्ति से निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है। गोगोई ने आरोप लगाया कि वर्तमान में सदन के भीतर ‘माइक’ को एक शस्त्र की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है—जब विपक्ष बोलना चाहता है, तो अक्सर उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष को यह प्रस्ताव लाकर कोई खुशी नहीं हो रही है और ओम बिरला जी से कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए गलत परंपराओं पर सवाल उठाना उनका संवैधानिक कर्तव्य है।
सोमवार से ही विपक्षी दल पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा की मांग को लेकर अड़े हुए थे, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। जब दोपहर तीन बजे कार्यवाही पुनः शुरू हुई, तो विपक्षी सदस्य आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे। राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न मिलने पर हंगामा और बढ़ गया। इसी शोर-शराबे के बीच, स्पीकर को हटाने के नोटिस पर चर्चा तो शुरू हुई, लेकिन हंगामे के कारण मतदान की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे नहीं बढ़ सकी। पीठासीन सभापति ने बार-बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, लेकिन सदन में गतिरोध बरकरार रहा।
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान एक नया तकनीकी विवाद खड़ा हो गया है। जब खुद स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है, तो वे आसन पर नहीं बैठ सकते। ऐसे में उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) की अनुपस्थिति को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष का दावा है कि चर्चा को नियमानुसार आगे बढ़ाने के लिए पहले एक कार्यवाहक अध्यक्ष या विधिवत व्यवस्था की आवश्यकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नियमों की व्याख्या को लेकर चल रहे इस आरोप-प्रत्यारोप ने सदन के माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। पूरा देश अब इस बात पर नजर गड़ाए है कि क्या यह अविश्वास प्रस्ताव सदन में टिक पाएगा या सरकार अपना बहुमत सिद्ध करने में सफल रहेगी।
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