लोकसभा स्पीकर ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए शिवसेना के शिंदे गुट से जुड़े छह सांसदों को मान्यता दे दी है। साथ ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति भी प्रदान की गई है।
लोकसभा स्पीकर ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए शिवसेना के शिंदे गुट से जुड़े छह सांसदों को मान्यता दे दी है। साथ ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से अलग हुए बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति भी प्रदान की गई है।

Lok Sabha Speaker Decision: मानसून सत्र के आगाज से ठीक पहले भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हाल ही में विपक्षी दलों में मची टूट के चलते समीकरण बदल गए हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर ‘नेशनल सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) का गठन किया है और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से इसे आधिकारिक मान्यता देने की मांग की है। इसी तरह, शिवसेना (यूबीटी) को भी बड़ा झटका लगा है, जहाँ उनके 6 लोकसभा सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। लोकसभा स्पीकर ने इन दोनों घटनाक्रमों को अपनी मंजूरी दे दी है, जिससे संसद के भीतर विपक्षी एकता और फ्लोर मैनेजमेंट की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है।


संसद के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक 19 जुलाई को सुबह 11 बजे पार्लियामेंट हाउस एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित की जाएगी। रिजिजू ने टीएमसी से अलग हुए बागी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय और NCPI की चीफ व्हिप के रूप में नामित डॉ. काकोली घोष दस्तीदार को भी इस बैठक के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी सत्र के दौरान सदन में उठाए जाने वाले महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आम सहमति बनाना है ताकि सत्र की कार्यवाही बिना किसी व्यवधान के चल सके।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई, 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त, 2026 तक चलेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारत सरकार की सिफारिश पर इस सत्र के आयोजन को स्वीकृति दी है। सत्र का लक्ष्य देश के ज्वलंत और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करना और महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को संपन्न करना है। सरकार उम्मीद कर रही है कि इस दौरान कई जरूरी बिल पेश किए जाएंगे, जिन पर सदन में गहन विचार-विमर्श होगा।
मानसून सत्र के काफी हंगामेदार होने की संभावना है। विपक्ष ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकार को घेरने के लिए पूरी तैयारी में हैं। नीट-यूजी पेपर लीक का मुद्दा और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हुई हताहतों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की टिप्पणी पर विपक्ष ने तीखे तेवर अपनाए हैं। कांग्रेस ने रक्षा मंत्री की टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दिया है। टीएमसी, शिवसेना (यूबीटी) और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के दल-बदल से उपजी राजनीतिक अस्थिरता भी सदन के भीतर गरमागरम बहस का मुख्य केंद्र बनेगी। विपक्ष इन मुद्दों के माध्यम से सरकार को संसद में घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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