LPG Price Hike
LPG Price Hike: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष की तपिश अब भारतीय रसोई तक पहुंच गई है। केंद्र सरकार द्वारा रसोई गैस सिलेंडर के दामों में की गई अचानक वृद्धि ने देश भर में हलचल पैदा कर दी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मूल्य वृद्धि के विरोध में रविवार को एक विशाल विरोध मार्च का आह्वान किया है। इस बीच, आम जनता के मन में यह डर बैठ गया है कि क्या अब पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी आसमान छुएंगी? इसी गरमागरम माहौल के बीच भाजपा नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने मुख्यमंत्री पर तीखा पलटवार किया है।
भाजपा के दिग्गज नेता मिथुन चक्रवर्ती ने आज कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालय में मीडियाकर्मियों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध मार्च पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जो कर रही हैं, वह केवल राजनीति है। उन्हें अच्छी तरह पता है कि गैस और ईंधन कहां से आता है।” मिथुन ने वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि जब दुनिया में युद्ध का माहौल होता है, तो संसाधनों की कमी होना स्वाभाविक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ सकते हैं, क्योंकि भारत ईंधन के लिए बाहरी देशों पर निर्भर है।
महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष को घेरते हुए मिथुन चक्रवर्ती ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अन्य राज्यों की तुलना में पश्चिम बंगाल में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अधिक क्यों हैं? उन्होंने संकेत दिया कि राज्य सरकार टैक्स कम करके जनता को राहत दे सकती है, लेकिन वह केवल केंद्र पर दोष मढ़ने का काम कर रही है। मिथुन का यह बयान सीधे तौर पर ममता सरकार की वित्तीय नीतियों और वैट (VAT) संरचना पर प्रहार माना जा रहा है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा वर्तमान में ‘परिवर्तन यात्रा’ के माध्यम से जनसंपर्क अभियान चला रही है। मिथुन चक्रवर्ती स्वयं कई स्थानों पर इस यात्रा का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि बंगाल में भाजपा की स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। पार्टी के भीतर एकजुटता बढ़ी है और सभी कार्यकर्ता मिलकर काम कर रहे हैं। मिथुन ने संदेश दिया कि “परंपरावादी लोग अब जाग रहे हैं” और आने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा को पिछले रिकॉर्ड से कहीं बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक चर्चा के दौरान मिथुन चक्रवर्ती ने एक गंभीर मुद्दा भी उठाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा बंगाल का विभाजन नहीं चाहती, बल्कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य पश्चिम बंगाल को ‘दूसरा बांग्लादेश’ बनने से रोकना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल राज्य में अशांति और असुरक्षा का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे चुनाव से पहले किसी भी तरह के उकसावे में न आएं और शांतिपूर्ण तरीके से अपना काम जारी रखें।
अंत में, मिथुन चक्रवर्ती ने राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे विभिन्न भत्तों और सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) के लंबित मामले पर भी चुटकी ली। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ सरकार भत्ते बांटने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी अपने हक के डीए के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मिथुन के इन शब्दों ने राज्य की आर्थिक स्थिति और सरकार की प्राथमिकताओं पर फिर से बहस छेड़ दी है।
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