Lumpy Skin Disease : देश के कई क्षेत्रों में गायों और अन्य गोवंशीय पशुओं में लंपी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालकों और आम लोगों की चिंता बनी रहती है। इस बीमारी में पशुओं को तेज बुखार आ सकता है, उनकी त्वचा पर गांठें उभर सकती हैं और दूध उत्पादन में भी कमी देखने को मिल सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लंपी से प्रभावित गाय का दूध इंसान पी सकते हैं? क्या इस दूध से लोगों में भी संक्रमण फैलने का खतरा रहता है? पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.एम. वार्ष्णेय के बताए गए विचारों के आधार पर आइए समझते हैं कि इस बीमारी और दूध के सेवन को लेकर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
लंपी स्किन डिजीज क्या है और कैसे फैलती है?
लंपी स्किन डिजीज एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गायों और भैंसों जैसे पशुओं को प्रभावित कर सकती है। यह बीमारी Lumpy Skin Disease Virus के कारण होती है, जो पॉक्सविरिडे परिवार और कैप्रिपॉक्सवायरस समूह से संबंधित है। संक्रमित पशुओं में बुखार, त्वचा पर कठोर गांठें, कमजोरी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह बीमारी पशुपालकों के लिए आर्थिक परेशानी भी पैदा कर सकती है।
क्या लंपी से पीड़ित गाय का दूध पी सकते हैं?
इंसानों में संक्रमण फैलने को लेकर क्या कहती है पशु चिकित्सा जानकारी?
डॉ. के.एम. वार्ष्णेय के अनुसार, लंपी स्किन डिजीज को जूनोटिक बीमारी नहीं माना जाता है। इसका अर्थ है कि लंपी वायरस सामान्य परिस्थितियों में संक्रमित पशुओं से सीधे इंसानों में बीमारी पैदा करने के लिए जाना नहीं जाता। इसलिए केवल लंपी संक्रमण के कारण गाय के दूध को इंसानों के लिए जहरीला मानना सही नहीं है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि संक्रमित पशु का दूध बिना किसी सावधानी के इस्तेमाल करना चाहिए।
दूध की सुरक्षा के लिए स्वच्छता क्यों जरूरी है?
दूध की सुरक्षा केवल लंपी वायरस पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पशु की सामान्य सेहत, दूध निकालने की स्वच्छता, भंडारण और गर्म करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। बीमार पशु का दूध इस्तेमाल करने से पहले स्थानीय पशु चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर है। यदि गाय की हालत गंभीर है, दूध में असामान्य बदलाव दिखाई देता है या पशु का इलाज चल रहा है, तो दूध का उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ से स्पष्ट निर्देश लें।
दूध पीने से पहले उबालना क्यों है जरूरी?
कच्चे दूध के सेवन से बचें
कच्चे दूध में कई तरह के हानिकारक सूक्ष्मजीव मौजूद हो सकते हैं। इसलिए लंपी से प्रभावित गाय ही नहीं, किसी भी पशु का दूध बिना उबाले पीने से बचना चाहिए। दूध को अच्छी तरह उबालना या उचित पाश्चुरीकरण करना खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। दूध गर्म करने के लिए स्वच्छ बर्तन का इस्तेमाल करें और उसे दूषित सतहों के संपर्क में आने से बचाएं। केवल उबालने के आधार पर हर तरह के जोखिम के पूरी तरह समाप्त होने की गारंटी नहीं दी जा सकती।
क्या 15 से 20 मिनट तक उबालना जरूरी है?
दूध को सुरक्षित बनाने के लिए हर परिस्थिति में 15 से 20 मिनट तक उबालना जरूरी नहीं होता। उचित तापमान पर पर्याप्त समय तक गर्म करना या पाश्चुरीकरण करना हानिकारक सूक्ष्मजीवों का जोखिम कम करने में मदद करता है। दूध को बार-बार लंबे समय तक उबालने के बजाय सुरक्षित तरीके से गर्म करना और सही ढंग से रखना अधिक महत्वपूर्ण है। अगर दूध की सुरक्षा को लेकर संदेह हो, तो उसका सेवन करने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह लें।
बीमार गाय के बछड़े को दूध पिलाते समय क्या करें?
बछड़े के लिए भी सावधानी जरूरी
यदि गाय लंपी स्किन डिजीज से संक्रमित है, तो उसके बछड़े को दूध पिलाने के बारे में पशु चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए। बछड़े की उम्र, सेहत और संक्रमण की स्थिति के अनुसार उचित देखभाल जरूरी है। दूध पिलाने के लिए स्वच्छता बनाए रखें और बीमार पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखने संबंधी पशु चिकित्सक के निर्देशों का पालन करें। दूध को गर्म करना अपने आप में संक्रमण नियंत्रण के सभी उपायों का विकल्प नहीं है।
लंपी से प्रभावित गाय का दूध इस्तेमाल करने से पहले जानें ये बातें
लंपी स्किन डिजीज से प्रभावित गाय का दूध इस्तेमाल करने से पहले पशु की स्थिति और चल रहे इलाज की जानकारी लेना आवश्यक है। कुछ दवाओं के इस्तेमाल के बाद दूध को निर्धारित अवधि तक उपयोग नहीं करना चाहिए। इसे Withdrawal Period कहा जाता है। इसलिए इलाज के दौरान या उसके बाद दूध इस्तेमाल करने से पहले पशु चिकित्सक के निर्देशों का पालन करें। पशु की बीमारी, दूध की गुणवत्ता और स्वच्छता को ध्यान में रखकर ही निर्णय लें।
निष्कर्ष: लंपी स्किन डिजीज को सामान्यतः इंसानों में फैलने वाली बीमारी नहीं माना जाता, लेकिन बीमार गाय का दूध बिना सावधानी इस्तेमाल करना उचित नहीं है। कच्चा दूध न पिएं, दूध को सुरक्षित तरीके से गर्म करें और संक्रमित पशु के दूध के सेवन को लेकर पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लें।
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