Lunar eclipse 2025: चंद्र ग्रहण 2025 के दौरान हिंदू धर्म में कई धार्मिक नियमों और मान्यताओं का विशेष पालन किया जाता है। इनमें से एक महत्वपूर्ण विषय है तुलसी पौधे का चयन और पूजा। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ग्रहण के समय तुलसी पूजा और तुलसी पत्तों का चयन वर्जित है। ग्रहण शुरू होने से पहले तुलसी के पत्ते तोड़कर सुरक्षित रखना जरूरी होता है ताकि पूजा में बाधा न आए और अशुभ प्रभाव से बचा जा सके। आइए विस्तार से जानें इस विषय से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और उपाय।
तुलसी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे विष्णुप्रिया कहा जाता है। तुलसी का पौधा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का प्रिय माना जाता है। तुलसी के पत्तों का प्रयोग हर पूजा-अर्चना में शुभ माना जाता है। शास्त्रों में तुलसी को माता का रूप माना गया है, इसलिए इसका सम्मान विशेष रूप से किया जाता है।
ग्रहण के समय वातावरण में राहु-केतु की नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। इस दौरान किसी भी पवित्र वस्तु को छूना या तोड़ना अशुभ माना जाता है। तुलसी को माता का रूप देने के कारण ग्रहण काल में तुलसी को छूना या तोड़ना वर्जित है।
ग्रहण की छाया तुलसी के पत्तों को अपवित्र कर देती है। इस कारण भगवान विष्णु और लक्ष्मी भी ग्रहणकाल में तुलसी के पत्तों को स्वीकार नहीं करते। इसलिए तुलसी पूजन और तुलसी दल अर्पण ग्रहण काल में निषिद्ध माने गए हैं।
ग्रहण शुरू होने से पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर उन्हें सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए। इस दौरान तुलसी पर गंगाजल छिड़कना शुभ माना जाता है ताकि उसकी पवित्रता बनी रहे। ग्रहण खत्म होने के बाद नहा-धोकर शुद्ध होकर तुलसी के पत्तों का उपयोग पूजा में किया जा सकता है।
ग्रहण काल में तुलसी तोड़ने वाले को पाप लगने की मान्यता है। इसलिए परिवार के बुजुर्ग और धार्मिक गुरुओं की सलाह होती है कि ग्रहण से पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़ लिए जाएं। इससे पूजा में व्यवधान नहीं आता और शास्त्रीय नियमों का भी पालन होता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक खगोलीय घटना है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन अनुशासन और श्रद्धा को बढ़ाता है। तुलसी एक औषधीय पौधा भी है, जिसका सम्मान करना जरूरी होता है। ग्रहण से पहले तुलसी को चुनना और सुरक्षित रखना इस सतर्कता का परिचायक है।
चंद्र ग्रहण 2025 में तुलसी पूजा और तुलसी के पत्ते तोड़ना निषेध है। ग्रहण से पहले तुलसी के पत्ते तोड़कर सुरक्षित स्थान पर रखना शुभ और शास्त्रसम्मत होता है। ग्रहण के बाद ही तुलसी का प्रयोग पूजा में करें ताकि किसी भी प्रकार के अशुभ प्रभाव से बचा जा सके। इस परंपरा का पालन करना न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है बल्कि परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और शांति भी बनाए रखता है।
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