Madhubani : बिहार के मधुबनी जिले में पुलिस हिरासत के दौरान रोशन यादव नामक युवक की संदिग्ध मौत का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। घटना को लेकर जन सुराज पार्टी ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक और बांकीपुर से नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर ने रविवार को घटना पर नाराजगी जताई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर मधुबनी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) से मुलाकात की।


प्रशांत किशोर ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने रोशन यादव की गिरफ्तारी की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मृतक के परिवार का आरोप है कि 27 मई को रहिका थाना पुलिस रोशन को बिना किसी लिखित नोटिस या पूर्व सूचना के अपने साथ ले गई थी। प्रशांत किशोर के मुताबिक, प्रथम दृष्टया रोशन की कोई आपराधिक छवि सामने नहीं आती थी। ऐसे में उसे किस आधार पर हिरासत में लिया गया, इसकी जांच जरूरी है।

परिवार ने लगाया हिरासत में पीटकर हत्या का आरोप
मामले में मृतक के परिजनों और पुलिस प्रशासन के दावों में बड़ा अंतर सामने आया है। परिवार का आरोप है कि रोशन यादव को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया और कथित तौर पर पीट-पीटकर उसकी जान ले ली गई। परिजनों ने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार किया है।
पुलिस ने आत्महत्या की बात कही
पुलिस, जेल प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की ओर से परिवार के आरोपों को खारिज किया गया है। प्रशासन की ओर से मौत को आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में घटना की वास्तविक वजह को लेकर सवाल बने हुए हैं। यही कारण है कि प्रशांत किशोर ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और सभी तथ्यों को सामने लाने की मांग की है, ताकि किसी भी पक्ष के दावे की सत्यता स्पष्ट हो सके।
SSP से मुलाकात में जांच का मिला भरोसा
प्रशांत किशोर ने बताया कि मधुबनी SSP और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी बैठक हुई। इस दौरान पुलिस प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया। अधिकारियों के मुताबिक, जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट (DM) की निगरानी में जांच आगे बढ़ाने और इसकी रिपोर्ट संबंधित आयोग को भेजने की बात भी कही गई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुल सकते हैं कई राज
घटना की सच्चाई सामने लाने में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशांत किशोर के अनुसार, अधिकारियों ने बताया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट दो से तीन दिनों के भीतर आने की संभावना है। रिपोर्ट के आधार पर युवक की मौत की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा हिरासत के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस की कार्रवाई की भी जांच किए जाने की जरूरत है।
प्रशासन को प्रशांत किशोर ने दिया दस दिन का समय
प्रशांत किशोर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन को 10 दिनों की समयसीमा दी है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है।
जांच में पारदर्शिता की मांग
जन सुराज पार्टी के नेता ने कहा कि पुलिस हिरासत में हुई मौत जैसे संवेदनशील मामले में जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार के आरोपों के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन के दावों की भी स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए। इससे न केवल घटना की वास्तविकता सामने आएगी, बल्कि लोगों का प्रशासन और कानून व्यवस्था पर भरोसा भी कायम रहेगा।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होती और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की जाती, तो जन सुराज पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पार्टी हर जरूरी कदम उठाएगी। फिलहाल सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों पर है।
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